राजगढ़ में 500 साल पुराना खोयरी महादेव मंदिर, पहाड़ियों और जंगलों के बीच विराजे बैजनाथ

 


राजगढ़, 19 अगस्त (हि.स.)। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में प्रकृति की गोद में स्थित खोयरी महादेव मंदिर आस्था, इतिहास, संत परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम है। नेवज नदी के तट पर घने खोयरा जंगलों और दो पहाड़ियों के बीच स्थित यह प्राचीन देवस्थल करीब पांच शताब्दियों से भगवान बैजनाथ महादेव और माता पार्वती की आराधना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। धार्मिक आस्था के साथ अपनी प्राकृतिक छटा के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों को भी आकर्षित करता है।

भील राजाओं ने कराया था मंदिर का निर्माण

स्थानीय मान्यता के अनुसार करीब वर्ष 1510 में भील राजाओं ने इस मंदिर की स्थापना कराई थी। उस समय इस क्षेत्र को ‘झंझनपुर’ के नाम से जाना जाता था। पहाड़ियों और जंगलों के बीच प्राकृतिक रूप से सुरक्षित स्थान पर मंदिर की स्थापना को क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति से जोड़कर देखा जाता है।

समय के साथ क्षेत्र में राजवंश बदले, लेकिन खोयरी महादेव के प्रति लोगों की आस्था कायम रही। वर्ष 1640 के आसपास इस क्षेत्र में राजपूत राजा रावत मोहन सिंह द्वारा उमठ-परमार राजवंश की स्थापना किए जाने का उल्लेख मिलता है। इसी दौर में मंदिर से जुड़ी धार्मिक गतिविधियों और साधना परंपरा को भी विस्तार मिला।

संतों की साधना से जुड़ा रहा देवस्थल

खोयरी महादेव मंदिर की धार्मिक परंपरा संतों की साधना से भी जुड़ी रही है। मान्यता है कि संत हरिदास जी महाराज के मार्गदर्शन में यहां महायज्ञ और तपस्या की परंपरा रही। संत हरिओम तत्सत जी महाराज, स्वामी निर्गुण जी महाराज और संत श्री श्री 1008 सीताराम दास जी महाराज जैसी संत विभूतियों की साधना से भी इस स्थल का संबंध बताया जाता है।

इसी कारण यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि साधना और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा धार्मिक स्थल भी माना जाता है।

जंगल, पहाड़ और नेवज नदी बढ़ाते हैं खूबसूरती

खोयरी महादेव की पहचान उसके प्राचीन मंदिर के साथ-साथ आसपास के प्राकृतिक वातावरण से भी है। चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ियां, घने जंगल और समीप बहती नेवज नदी इस स्थान को बेहद मनोहारी बनाते हैं। वर्षा ऋतु में जब पहाड़ियों और जंगलों पर हरियाली की चादर बिछ जाती है, तब मंदिर परिसर और आसपास का पूरा क्षेत्र और भी आकर्षक नजर आता है। धार्मिक आस्था के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के अलावा प्रकृति और शांत वातावरण पसंद करने वाले लोगों के लिए भी यह स्थान आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

नागों के जोड़े को लेकर लोकमान्यता

मंदिर से जुड़ी कई स्थानीय मान्यताएं भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर परिसर में प्राचीन समय से नागों के जोड़े के दिखाई देने की मान्यता रही है। हालांकि यह एक स्थानीय जनश्रुति है, लेकिन इस मान्यता ने मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा और जिज्ञासा को और बढ़ाया है।

धार्मिक आयोजनों में उमड़ते हैं श्रद्धालु

वर्तमान में खोयरी महादेव मंदिर का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। महाशिवरात्रि सहित विभिन्न धार्मिक पर्वों और विशेष अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भगवान बैजनाथ महादेव के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ लोग मंदिर के आसपास के प्राकृतिक वातावरण का भी आनंद लेते हैं।

करीब 500 वर्ष से अधिक पुराना खोयरी महादेव मंदिर आज भी राजगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जनजातीय इतिहास, राजवंशों की परंपरा, संतों की साधना और प्रकृति के अद्भुत मेल ने इस देवस्थल को अपनी अलग पहचान दी है।

हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक