मूंग खरीदी और खाद को लेकर किसानों का भोपाल कूच, मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की दी चेतावनी
भोपाल/नर्मदापुरम, 28 जुलाई (हि.स.) । मध्य प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर किसान सड़कों पर आ गए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले निकाली जा रही 'किसान क्रांति पैदल यात्रा' के दूसरे दिन मंगलवार को किसान बरखेड़ा से राजधानी भोपाल की ओर बढ रहे हैं। किसानों ने मांगें पूरी न होने पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की चेतावनी दी है।
सोमवार को नर्मदापुरम के नर्मदा ब्रिज से शुरू हुई इस पैदल यात्रा के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और किसानों के बीच तीखी झड़प हुई। प्रशासन द्वारा की गई नाकेबंदी और बैरिकेडिंग को दरकिनार करते हुए आक्रोशित किसान बुधनी क्षेत्र में पुलिस के 5 बैरिकेड्स हटाकर गड़रिया नाला पार कर गए। लगभग 10 से 11 घंटे तक चले पुलिस-प्रशासन और किसानों के बीच इस आमने-सामने के गतिरोध के बाद किसान देर रात औबेदुल्लागंज-बैतूल फोरलेन स्थित बरखेड़ा पहुंचे और वहीं पड़ाव डाला। मंगलवार को यात्रा पुनः भोपाल की ओर बढ़ी, जहां औबेदुल्लागंज टोल प्लाजा पर उन्हें भारी पुलिस बल ने रोक लिया, लेकिन बाद में जाने दिया गया।
औबेदुल्लागंज टोल प्लाजा के पास रुके किसान अब भोपाल की ओर निकल चुके हैं। किसान संगठनों के अनुसार, करीब 2 हजार किसान पैदल राजधानी की ओर बढ़ रहे हैं। उनके साथ सैकड़ों ट्रैक्टर, ट्रॉली और अन्य वाहन भी चल रहे हैं। पैदल मार्च भी शुरू कर दिया। आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं और भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। करीब 2000 से ज्यादा किसान अपने साथ ट्रैक्टर में 7 दिन का राशन-पानी लेकर आ रहे हैं। किसानों के आगे बढ़ने के बाद पुलिस और प्रशासन भी पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है। राजधानी की सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष हरपाल सिंह सोलंकी ने रायसेन जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों के रात्रि विश्राम को रोकने के लिए औबेदुल्लागंज स्थित गुरुद्वारे को बंद करवा दिया गया, जिसके कारण किसानों को खुले में रात बितानी पड़ी। किसान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विदिशा, रायसेन, हरदा, नर्मदापुरम और बुधनी के ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर पुलिस बल, एसडीएम और तहसीलदारों को तैनात कर नाकेबंदी कर दी गई है, ताकि अन्य किसान भोपाल मार्च में शामिल न हो सकें।
किसानों की मुख्य मांगों में प्रदेश में उत्पादित मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी की गारंटी देना, वर्तमान में जारी खाद वितरण व्यवस्था की अव्यवस्थाओं को तत्काल दूर करना और किसानों के अन्य लंबित मुद्दों पर ठोस निर्णय लेना शामिल है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत