अशोकनगर में आवेदनों का मालाधारी किसान, 6 बार फीस दी, पर जमीन मिली आधी!

 




अशोकनगर, 25 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक लाचारी और हठधर्मिता का एक अनोखा और हैरान करने वाला नज़ारा देखने को मिला। भ्रष्टाचार और दफ़्तरों के चक्कर काट-काटकर पस्त हो चुके एक पीड़ित किसान जब आवेदनों की माला पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया।

इतना ही नहीं, पीड़ित किसान ने जो कमीज पहन रखी थी, उस पर सिंधिया लिखा हुआ था और कमल का फूल छपा हुआ था। यह अनोखा विरोध अब पूरे जिले में कौतूहल और चर्चा का विषय बना हुआ है।

मामला क्या है? (6 बार फीस, फिर भी इंसाफ़ अधूरा)

नईसराय तहसील के ग्राम अमरौद सिंगराना निवासी पीड़ित किसान छत्ता पुत्र हीरा जाटव के पास सर्वे नंबर 136/2 में कुल 5 बीघा जमीन दर्ज है। किसान ने जमीन के सीमांकन (नाप-जोख) के लिए नियमानुसार एक-दो नहीं, बल्कि 6 बार सरकारी फीस जमा की। आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद गिरदावर (कानूनगो) सुरेंद्र सिंह यादव द्वारा मौके पर केवल 3 बीघा जमीन ही दी जा रही है। बाकी 2 बीघा का हिसाब सरकारी फाइलों में ही कहीं गुम है।

गिरदावर की धौंस, 15 साल में मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सका!

पीड़ित किसान का आरोप है कि जब उसने अपनी पूरी 5 बीघा जमीन की मांग की, तो गिरदावर सुरेंद्र सिंह यादव ने साफ लहजे में धमकाते हुए कहा जितनी मिल रही है उतनी लो, वरना दूसरे के नाम कर दूंगा! मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। 15 साल से मेरा तबादला नहीं हुआ, जबकि इस दौरान 6 पटवारी और तहसीलदार बदल चुके हैं।

हेल्पलाइन (181) को भी पुलिस का डर दिखाकर करवाया बंद:

न्याय की उम्मीद में किसान ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन आरोप है कि प्रशासनिक अमले ने पुलिस का डर दिखाकर और दबाव बनाकर उस शिकायत को भी जबरन बंद करवा दिया। किसान का आरोप है कि दबंगों से पैसे लेकर गरीबों की जमीन दबाने और खुलेआम शोषण करने का यह खेल बेधडक़ जारी है।

पीड़ित किसान छत्ता ने कलेक्टर के सामने गुहार लगाते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की है नईसराय तहसील के गिरदावर सुरेंद्र सिंह यादव और पटवारी हिमानी को हलका क्षेत्र से तत्काल हटाया/स्थानांतरित किया जाए। 5 बीघा जमीन का निष्पक्ष सीमांकन कर कब्जा दिलवाया जाए, ताकि गरीब किसानों का प्रशासनिक उत्पीडऩ बंद हो सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार