सागर: पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

 


सागर, 16 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान परियोजना के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एकात्म मानव दर्शन: विकसित भारत 2047 का गुरुवार को गरिमापूर्ण समापन हुआ।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद डॉ. लता वानखेड़े उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च शिक्षा सागर संभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. नीरज दुबे ने की। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में आरोग्य भारती के जिला संयोजक डॉ. सुखदेव मिश्र, ओएसडी डॉ. भावना यादव और पीएम उषा प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी मंच पर मौजूद रहीं।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने कहा कि एकात्म मानव दर्शन केवल एक राजनीतिक विचार नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन का संपूर्ण और समग्र दर्शन है। हमारा लक्ष्य 'विकसित भारत-2047' तभी साकार हो सकता है, जब विकास का केंद्र केवल आर्थिक प्रगति न होकर मनुष्य का समग्र विकास (मन, बुद्धि, शरीर और आत्मा का संतुलन) होगा। समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति का उत्थान यानी 'अंत्योदय' ही इस दर्शन की मूल आत्मा है।

अकादमिक सत्र की सराहना करते हुए सांसद डॉ. वानखेड़े ने कॉलेज प्रशासन और विद्यार्थियों की मांग पर तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने सांसद निधि से महाविद्यालय के आदि गुरु शंकराचार्य सभागार के लिए एयर कंडीशनर और इनवर्टर उपलब्ध कराने की एक बड़ी घोषणा की, जिसका सभी ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।

डॉ. नीरज दुबे ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि शासन द्वारा आयोजित ऐसी अकादमिक संगोष्ठियों की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब इनके शोध निष्कर्ष पुस्तक या शोध प्रकाशन के रूप में समाज और नई पीढ़ी तक पहुंचें।

डॉ. सुखदेव मिश्र (जिला संयोजक, आरोग्य भारती) ने रेखांकित किया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय पूंजीवाद या साम्यवाद के नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित एकात्म मानववाद के पक्षधर थे। इसमें प्रकृति, पर्यावरण और समग्र विकास का बेहद सुंदर संतुलन है, जिसे आधार बनाकर वर्तमान सरकारें राष्ट्र निर्माण में जुटी हैं।

अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि पंडित दीनदयाल जी के विचारों के अनुसार, अज्ञानता और अभाव से मुक्ति ही ज्ञान की असली सार्थकता है। उन्होंने ही सांसद जी के समक्ष सभागार को वातानुकूलित करने की मांग रखी थी।

डॉ. संगीता मुखर्जी (संयोजक) ने दो दिवसीय सफल आयोजन का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि दोनों दिनों में विषय विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, सामाजिक समरसता और सतत विकास जैसे गंभीर विषयों पर सार्थक मंथन किया।

समापन सत्र से ठीक पहले आयोजित हुए दूसरे दिन के प्रथम तकनीकी सत्र में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए 28 शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि द्वारा सभी शोधार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

डॉ. इंदिरा जैन (मुख्य वक्ता, दमोह महाविद्यालय) ने अंत्योदय की भावना को सरकारी नीतियों के केंद्र में रखने पर विशेष बल दिया।

डॉ. आशीष द्विवेदी (निदेशक, इंक मीडिया संस्थान) ने कहा कि आधुनिक मीडिया और संचार माध्यमों के प्रभावी उपयोग से इस दर्शन के सिद्धांतों को युवा पीढ़ी तक आसानी से पहुँचाया जा सकता है।

प्रो. अनुपमा कौशिक (अध्यक्ष, डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय), सत्र की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और मानसिक तनाव का एकमात्र समाधान प्रकृति और मानव के बीच संतुलन स्थापित करने वाले इसी एकात्म मानव दर्शन में निहित है।

शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रमुख नाम:

सत्र में डॉ. प्रज्ञा दुबे, प्रदीप सोनी, अंकेश कुमार, अश्वनी तिवारी, विवेक श्रीवास्तव, अनुभूति तिवारी, उन्नति मिश्रा, विनीत वर्मा, गिरिराज अहिरवार, नेहा पटेल, नितेश पटेल, डॉली पांडे, गिरीश कुमार रैकवार और अमन लोधी सहित अन्य शोधार्थियों ने अपने विचार रखे। इस संगोष्ठी से बड़ी संख्या में लोग ऑफलाइन के साथ-साथ यूट्यूब लाइव के जरिए भी ऑनलाइन जुड़े रहे।

संगोष्ठी के समापन कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें सुमित यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन संगोष्ठी के सहसंयोजक डॉ. संदीप सबलोक और तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. अभिलाषा जैन ने किया। अंत में संगोष्ठी की समन्वयक डॉ. प्रतिभा जैन ने सभी अतिथियों, शोधार्थियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दो दिवसीय आयोजन में डॉ. गोपा जैन, डॉ. विनय शर्मा, डॉ. अमर कुमार जैन, डॉ. संगीता कुंभारे, डॉ. शुचिता अग्रवाल, डॉ. राणा कुंजर सिंह, अवधेश प्रताप सिंह, डॉ. नीलम सिंह, डॉ. शैलेंद्र सिंह राजपूत, विकास त्रिपाठी, अरविंद चतुर्वेदी, रेणु सोलंकी, आयुष बड़कुल, डॉ. अंकुर गौतम, डॉ. संदीप तिवारी, रितु त्रिपाठी, वसुंधरा गुप्ता, भानुप्रिया पटेल, शिखा चौबे, रश्मि दुबे समेत महाविद्यालय का समस्त शैक्षणिक स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे