ईडी की इंदौर में बड़ी कार्रवाई, रुचि अक्रोनी इंडस्ट्रीज की 7.76 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अटैच
इंदौर, 29 अप्रैल (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश के इंदौर में बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मेसर्स रुचि अक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (वर्तमान नाम स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड) की 7.76 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) कर लिया है।
ईडी द्वारा बुधवार को जानकारी दी गई कि उक्त कार्रवाई यूको बैंक की इंदौर शाखा को 58 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान पहुंचाने के मामले की जांच के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की है। ईडी द्वारा अटैच की गई इन संपत्तियों में कंपनी के नाम पर दर्ज विभिन्न औद्योगिक और आवासीय भूखंड शामिल हैं।
दरअसल, रुचि अक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके संचालकों पर यूको बैंक की इंदौर शाखा को 58 करोड़ रुपए से अधिक का वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए सीबीआई भोपाल में शिकायत दर्ज कराई थी। बैंक की शिकायत के मुताबिक, कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों और गलत जानकारी के आधार पर करोड़ों रुपये की क्रेडिट सुविधाएं और लेटर ऑफ क्रेडिट हासिल किए थे।
सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ईडी ने मामले की जांच शुरू थी, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया कि कंपनी ने बैंक से मिली भारी-भरकम राशि का उपयोग उस व्यापारिक उद्देश्य के लिए नहीं किया, जिसके लिए वह ली गई थी। रकम को सोची-समझी साजिश के तहत विभिन्न सहयोगी और समूह की कंपनियों के बैंक खातों में डायवर्ट कर दिया गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, फंड की लेयरिंग करने के लिए कंपनियों का एक जटिल जाल बुना गया था, ताकि पैसे के स्रोत का पता न चल सके। अंततः यह पैसा घुमा-फिराकर उन्हीं संस्थाओं के पास पहुंचा, जिन पर मुख्य आरोपियों का नियंत्रण था। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से अवैध धन को वैध निवेश के रूप में पेश करने की कोशिश की गई थी।
ईडी की टीम ने जब पैसे के लेनदेन की जांच की, तो पाया गया कि गबन की गई इस राशि का एक बड़ा हिस्सा अलग-अलग स्तरों पर अचल संपत्तियों को खरीदने और निवेश करने में इस्तेमाल किया गया था। वर्तमान में जिन संपत्तियों को अटैच किया गया है, वे उन्हीं संदिग्ध लेन-देन के जरिए बनाई गई थीं।
यह इस मामले में ईडी की पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी जांच एजेंसी ने इसी प्रकरण में 10.15 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की थीं। ताजा कार्रवाई के बाद इस मामले में अब तक कुल 17.91 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की जा चुकी है। ईडी का कहना है कि मामले की गहन जांच अभी जारी है और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से लेकर फंड डायवर्जन के अन्य पहलुओं को खंगाला जा रहा है। आने वाले दिनों में कुछ अन्य बड़ी गिरफ्तारियां और संपत्तियों की कुर्की होने की संभावना जताई जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर