डिंडौरी: आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की कार्रवाई: 2016 से 25 के बीच एरियर, भत्तों-भुगतान में गड़बड़ी

 


डिंडौरी, 21 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले के स्वास्थ्य विभाग में 60.60 लाख रुपये के कथित गबन पर जबलपुर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने शुरुआती जांच के बाद दो पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों समेत छह अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध दर्ज किया गया है।

जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 से 2025 के बीच आईएफएमआईएस पोर्टल पर एरियर की गलत गणना, पात्रता से अधिक भुगतान,फर्जी प्रविष्टियों और वेंडर को दोहरा भुगतान करने जैसी गड़बड़ियां की गईं। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के अनुसार, इन अनियमितताओं से शासन को कुल 60.60 लाख रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचने की बात सामने आई है।

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ पुलिस अधीक्षक एसपी अनिल विश्वकर्मा ने बुधवार काे बताया कि आरोपी स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय की लेखा शाखा में क्रिएटर, वेरिफायर और अप्रूवर के रूप में काम कर रहे थे। आरोप है कि आईएफएमआईएस पोर्टल पर एरियर की गलत गणना के पत्रक तैयार किए गए और बिना पात्रता तथा वैधानिक आधार के अधिक राशि के भुगतान दर्ज किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कार्यालयीन रिकॉर्ड की जांच और मैन्युअल गणना पत्रकों के सत्यापन के बिना सिस्टम में अधिक राशि की प्रविष्टियां की गईं।

पहले मैन्युअल तरीके से भुगतान किए जा चुके एरियर की राशि को आईएफएमआईएस पोर्टल पर नेगेटिव प्रविष्टि के जरिए समायोजित करने के बजाय कथित तौर पर गलत भुगतान किया गया। इस तरीके से एरियर के मद में 49.89 लाख रुपए के अवैध भुगतान का मामला सामने आया है।

जांच के अनुसार, बिना वैधानिक आदेश के मद परिवर्तन कर नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस और गृह भाड़ा भत्ते के रूप में 5.89 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसके अलावा वेंडर को दी जाने वाली राशि में भी दोहरे और गलत भुगतान की गड़बड़ी सामने आई। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ का आरोप है कि भुगतान के बिलों को पात्रता नियमों की अनदेखी करते हुए डिजिटल हस्ताक्षर से स्वीकृत किया गया। इसके बाद सरकारी राशि लाभार्थियों और संदिग्ध बैंक खातों में ट्रांसफर हुई।

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के अनुसार तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रमेश सिंह मरावी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि जुलाई 2024 में गुलाब प्रसाद साहू, सहायक ग्रेड-3, को आईएफएमआईएस पोर्टल के ‘जुलाई के बाद 2017 'बकाया स्क्रीन' का उपयोग कर 4.78 लाख रुपए का भुगतान बिना वैधानिक आदेश और संबंधित दस्तावेजों के किया गया। उस समय गुलाब प्रसाद साहू स्वयं लेखा शाखा के प्रभारी थे।

जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपियों ने कथित आपराधिक साजिश के तहत अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग कर स्वयं या अन्य लोगों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(सी), 13(1)(ए), 13(2) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की विवेचना जारी है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला