छात्रों की गूंज अभियान के तहत नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने छात्रावास में छात्रों से संवाद किया
भोपाल, 22 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बुधवार को भोपाल स्थित डॉ. अंबेडकर अनुसूचित जाति महाविद्यालयीन छात्रावास में कांग्रेस के छात्रों की गूंज अभियान के तहत विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों की समस्याओं को सुनते हुए शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया, सरकारी छात्रावासों की स्थिति और निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला।
सिंघार ने कहा कि आज देश और प्रदेश का छात्र केवल बेरोजगारी से ही नहीं, बल्कि पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और बदहाल छात्रावासों जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल है।
दिल्ली छात्र आंदोलन का किया जिक्र
नेता प्रतिपक्ष ने 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में आयोजित छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और भर्ती सुधारों की मांग को लेकर संसद मार्च कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसमें 200 से अधिक छात्र घायल हुए। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए कहा कि छात्रों की आवाज़ को बलपूर्वक दबाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने छात्राओं के साथ पुलिस के व्यवहार की भी आलोचना की और कहा कि छात्रों के समर्थन में शांतिपूर्ण धरने पर बैठे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लेना भी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
विधानसभा में छात्रों के मुद्दों की अनदेखी का आरोप
सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार विधानसभा में अन्य राजनीतिक विषयों पर लंबी चर्चा करती है, लेकिन पेपर लीक, भर्ती में देरी और युवाओं के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचती है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस ने इन विषयों पर चर्चा की मांग की तो सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने छात्रों की तुलना कीड़ों और उपद्रवियों से की, जिसके विरोध में कांग्रेस विधायक देर रात तक मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे रहे।
निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 के माध्यम से प्रदेश में उच्च शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि सरकारी विश्वविद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी, सीमित बजट और संसाधनों के अभाव से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त सामाजिक दायित्व है और कांग्रेस इस विधेयक का विधानसभा से लेकर जनता के बीच विरोध करेगी।
भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा बजट पर चिंता
सिंघार ने कहा कि एमपीपीएससी और एमपीईएसबी की करीब 50 भर्ती परीक्षाओं में हर वर्ष 25 से 30 लाख आवेदन आते हैं, लेकिन नियुक्तियां वर्षों तक लंबित रहती हैं। समय पर विज्ञापन, परीक्षा और परिणाम नहीं आने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच एमपीपीएससी की प्रस्तावित 44 परीक्षाओं में से केवल 28 आयोजित हुईं, जबकि 16 के विज्ञापन तक जारी नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2026-27 के बजट में उच्च शिक्षा के लिए मात्र 0.96 प्रतिशत यानी 4,246 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो शिक्षा के प्रति सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।
छात्रावासों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाया
नेता प्रतिपक्ष ने सरकारी छात्रावासों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 2,671 जनजातीय छात्रावासों और आश्रमों में लगभग डेढ़ लाख विद्यार्थी रह रहे हैं, लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में कई छात्रावासों में बिस्तर, शौचालय, पेयजल, भोजन कक्ष और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी उजागर हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 की कैग रिपोर्ट के अनुसार स्वीकृत 13 पीवीटीजी छात्रावासों में से पांच जनवरी 2024 तक भी पूरे नहीं हो सके, जबकि कई निर्माण कार्य 6 से 40 माह तक विलंबित रहे।
सिंघार ने कहा कि कांग्रेस का छात्रों की गूंज अभियान राहुल गांधी की उस सोच का विस्तार है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वर्तमान शिक्षा, परीक्षा और रोजगार व्यवस्था युवाओं और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी लगातार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से पेपर लीक रोकने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे