सागरः डॉक्टर्स डे पर मेगा हेल्थ कैंप का आयोजन
सागर, 01 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर बुधवार को मध्य प्रदेश के सागर जिले के आयुष्मान आरोग्य मंदिर, कपूरिया में एक दिवसीय विशेष टीबी जांच, जागरूकता शिविर तथा कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन मेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस वृहद कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर आमजन को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं से अवगत कराना, टीबी (क्षय रोग) की समय पर पहचान व रोकथाम के प्रति जागरूक करना और आपातकालीन स्थितियों में किसी की जान बचाने के लिए बेहद जरूरी सीपीआर तकनीक का व्यवहारिक ज्ञान देना था।
कार्यक्रम को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर (जिन्हें पूर्व में आयुष्मान भारत–स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र के नाम से जाना जाता था) भारत सरकार की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम हैं। उन्होंने जानकारी साझा की, कि वर्तमान में सागर जिले में 247 आयुष्मान आरोग्य मंदिर पूरी सक्रियता से संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियों की मुफ्त जांच, दवा वितरण और विशेषज्ञ डॉक्टरों से टेली-परामर्श की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
टीबी जागरूकता सत्र के दौरान डॉ. तल्हा साद ने बीमारी के प्रसार पर प्रकाश डालते हुए बताया कि क्षय रोग मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से हवा के जरिए फैलता है। उन्होंने लेटेंट टीबी के खतरे को रेखांकित करते हुए कहा कि जिन लोगों में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, उनके लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है। समय रहते इस जांच को कराने और निवारक उपचार लेने से भविष्य में सक्रिय टीबी होने का खतरा लगभग 80 प्रतिशत तक कम हो जाता है।
इस एक दिवसीय शिविर के दौरान स्थानीय क्षेत्र के 47 नागरिकों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की गई। इसके लिए शिविर में रक्त परीक्षण, बलगम (खांसी) की जांच और पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे जैसी आधुनिक मशीनों का उपयोग किया गया। सघन जांच के दौरान 3 नागरिकों में टीबी के संभावित लक्षण पाए गए, वहीं 2 नए मधुमेह के मरीजों की भी पहचान हुई। इन सभी को आवश्यक परामर्श देकर उपचार के लिए आगे की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
इस मेगा कार्यक्रम का सबसे मुख्य और आकर्षक हिस्सा मैनिकिन (पुतले) पर आधारित सीपीआर मेगा प्रशिक्षण रहा। मुख्य प्रशिक्षक डॉ. अजय सिंह ने उपस्थित नागरिकों और स्वास्थ्य कर्मियों को कार्डियक अरेस्ट या हृदय गति रुकने जैसी गंभीर आपातकालीन परिस्थितियों में वैज्ञानिक तरीके से सीपीआर देने की विधि सिखाई। उन्होंने बताया कि सही समय पर और सही तरीके से दिया गया सीपीआर मरीज के मस्तिष्क और अन्य संवेदनशील अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह बनाए रखता है। अस्पताल पहुंचने से पहले यह तकनीक किसी भी इंसान का जीवन बचाने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है।
इस स्वास्थ्य शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला क्षय अधिकारी डॉ. आरिफ कुरैशी, डॉ. अभय, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रविकांत अहिरवार, एएनएम रजनी, पिरामल स्वास्थ्य से आयुषी शुक्ला सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का सराहनीय एवं सक्रिय योगदान रहा। आईएमए एवं आईएसए सागर के पदाधिकारियों ने अंत में संकल्प दोहराया कि यह आयोजन उनकी निरंतर चलने वाली जनस्वास्थ्य जागरूकता मुहिम का एक हिस्सा है। आने वाले समय में भी सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न कार्यालयों में इस प्रकार के टीबी जागरूकता और सीपीआर प्रशिक्षण कैंप आयोजित किए जाएंगे, ताकि 'टीबी मुक्त भारत' के राष्ट्रीय संकल्प को जनभागीदारी से साकार किया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे