अनूपपुर: गेंहू खरीदी सहित किसानों की समस्याओं को लेकर जिला कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन, सौंपा मांग पत्र

 




अनूपपुर, 09 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में गुरुवार को गेहूं खरीदी में देरी और किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री मुर्दाबाद के लगे नारे, किसानों की विभिन्न समस्याओं के संबंध मांग पत्र सौंपा। साथ ही चेतवनी दी कि किसानों के हित में समस्याओं का समाधान जल्द करें, अन्यथा किसान हित में अनूपपुर कांग्रेस उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होगी, जिसकी सम्पूर्ण जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी। कांग्रेस द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में विधायक फुंदेलाल सिंह, पूर्व विधायक सुनील सराफ और जिला अध्यक्ष गुड्डू चौहान, पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश सिंह सहित जिले के विभाग, प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्षगण, जिले वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधि, तीनों विधानसभा क्षेत्र के ब्लॉक अध्यक्ष, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, सेवादल, एनएसयूआई के जिला, विधानसभा, ब्लॉक, मंडलम, सेक्टर के पदाधिकारी नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए।

नेताओं ने आरोप लगाया कि खरीदी देर से और अधूरी है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है, प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को इनकम टैक्स के दायरे में लाना चाहती है। वहीं सरकार से कई मांगें रखते हुए जल्द समाधान की मांग की। जिला अध्यक्ष गुड्डू चौहान ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों की विरोधी है और उनकी कमर तोड़ रही है। गेहूं, मक्का और चना की खरीदी किसानों से नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापारी माल खरीदकर किसानों के नाम पर तौल रहे हैं, जिसका लाभ भाजपा से जुड़े व्यापारियों को मिल रहा है। उन्होंने गेहूं खरीदी की तारीख बार-बार बढ़ाने पर भी सवाल उठाए।

फर्टिलाइजर के दाम 10 गुना बढ़ गए

विधायक फुंदेलाल सिंह ने बताया कि जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, फर्टिलाइजर के दाम 10 गुना बढ़ गए हैं। मध्य प्रदेश में कूपन सिस्टम लागू किया गया है, जिससे किसानों को खाद मिलने में परेशानी हो रही है और ब्लैक में ऊंचे दामों पर खाद बिक रहा है। फसल बीमा न होने और सोयाबीन व मक्का को भी समर्थन मूल्य पर खरीदने की मांग उठाई।

मांग पत्र में उल्लेख किया गया कि प्रदेश की सत्तारूढ भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण आज अन्न दाता किसान काफी परेशानियों से जूझ रहा है। किसानों की गेहू की उपार्जन की तारीखे बार बार बढ़ाई जा रही है पहले 23 मार्च, फिर 1 अप्रैल, 10 अप्रैल, 15 अप्रैल की गई है जिससे किसानों में भारी आक्रोश निर्मित हो गया है। प्रदेश में किसानों को गेहूं उपार्जन का इंतजार खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। प्रदेश सरकार ने सहकारी संस्थाओं से किसानों का ऋण वसूलने की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की थी सरकार के कुप्रबंधन के कारण लगभग 50 प्रतिशत किसान डिफाल्टर हो गए है तथा किसानों को कृषि उप मडी में अपनी उपज 2000 से 2200 रूपये के ओने पौने दामों में मजबूरी में बेचने को विवश होना पड़ रहा है, जबकि पडोसी राज्य राजस्थान में 16 मार्च से गेहू उपार्जन किया जा रहा है। गेहूं सहित सभी रवि फसल उपार्जन के लिए लंबित पंजीयन कार्यों को अविलंब पंजीकृत कर किसानों के उपार्जन खरीदी सुनिश्चित करने, कृषि पंप कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर लगाना बंद किया जाए। खरीफ एवं रवि फसलों के अलावा जायज फसल एवं सब्जी उत्पादक किसानों को रासायनिक खाद की आपूर्ति सुनिश्चित कराया जाए। किसानों को कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्धता कराया जाए। आगामी खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त रासायनिक खाद एवं बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित कराया जाए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला