अनूपपुर: इंगाराजविवि में संघ की राजभाषा नीति पर परिचर्चा, हिंदी के व्यावहारिक प्रयोग और द्विभाषी शिक्षा पर हुई चर्चा
अनूपपुर, 29 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के राजभाषा प्रकोष्ठ एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी माह-2026 के अंतर्गत मंगलवार को ‘संघ की राजभाषा नीति’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।
उद्घाटन सत्र में राजभाषा प्रकोष्ठ की हिंदी अधिकारी एवं हिंदी माह-2026 की समन्वयक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने परिचर्चा के विषय की पृष्ठभूमि और वर्तमान संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
प्रो. आलोक श्रोत्रिय, प्राध्यापक, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विज्ञान विभाग ने संविधान में राजभाषा से संबंधित प्रावधानों तथा राजभाषा अधिनियम के ऐतिहासिक पक्षों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने भारत में राजभाषा के संदर्भ में ‘क’, ‘ख’ एवं ‘ग’ क्षेत्रों के विभाजन और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।
परिचर्चा में आमंत्रित वक्ताओं के रूप में प्रो. एम.टी.वी. नागराजू, प्रो. राघवेन्द्र मिश्र, डॉ. दिग्विजय फुकान, डॉ. राकेश सोनी, डॉ. वीरेन्द्र प्रताप तथा डॉ. सौरभ कुमार ने सहभागिता की। वक्ताओं ने विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रमों, प्रश्नपत्रों एवं अन्य महत्वपूर्ण शैक्षणिक सामग्री को द्विभाषी रूप में तैयार एवं जारी करने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए।
वक्ताओं ने अखिल भारतीय स्तर पर विभिन्न माध्यमों से हिंदी की व्यावहारिक पहुंच बढ़ाने तथा राजभाषा के क्षेत्रवार विभाजन के व्यावहारिक पक्षों पर भी चर्चा की। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर हिंदी के मौखिक और लिखित प्रयोग में दिखाई देने वाले अंतर तथा राजभाषा प्रकोष्ठ के माध्यम से परिचर्चा से प्राप्त सुझावों को शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार तक भेजने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श हुआ। परिचर्चा के दौरान उपस्थित शोध अध्येताओं एवं विद्यार्थियों से भी सुझाव आमंत्रित किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वीरेन्द्र प्रताप, सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग ने किया।
हिंदी माह-2026 के अंतर्गत आयोजित इस परिचर्चा में डॉ. के. वेंकटेसन, सह-प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, गृह विज्ञान विभाग तथा डॉ. के. सुमन, सहायक प्राध्यापक, भाषाविज्ञान एवं जनजातीय भाषाओं का व्यतिरेकी अध्ययन विभाग सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक विभागों के शोध अध्येताओं एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। अंत में डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त करते हुए परिचर्चा का समापन किया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला