समर्पण और संवेदनशीलता से ही मातृ मृत्यु दर में आएगी प्रभावी कमी: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

 


प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के संयोजकत्व में कार्यशाला संपन्न

भोपाल, 29 मई (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि समर्पण भाव से कार्य कर मातृ मृत्यु दर को कम करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिये राज्य सरकार द्वारा किये गये सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में आई ऐतिहासिक गिरावट स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, जमीनी स्तर पर कार्यरत अमले की मेहनत और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली का परिणाम है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने शुक्रवार काे श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय अन्तर्गत प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा आयोजित मातृ मृत्यु दर को कम करने के संबंध में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्हाेंने कहा कि प्रदेश का एमएमआर 2018-20 में 173 था जो 2022-24 में घटकर 135 रह गया। यह 38 अंकों यानी लगभग 22 प्रतिशत की गिरावट है जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी से भी अधिक है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, प्रशिक्षित डॉक्टर्स एवं स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के विस्तार से सकारात्मक अनुपात को 70 से नीचे लाये।

उन्होंने कहा कि प्रतिमाह की 9 व 25 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत आयोजित होने वाले स्वास्थ्य परीक्षण में डॉक्टर्स अनिवार्य: उपस्थित रहें। आशा कार्यकर्ता प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीयन करें तथा उनकी नियमित जांच व स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच से इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने वरिष्ठ चिकित्सकों से अपेक्षा की स्वास्थ्य केन्द्रों की नियमित जांच करें और टेली मेडिसिन को भी बढ़ावा दें।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी तथा दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर पहुंच से ही इस चुनौती को स्वीकार कर लक्ष्य की प्रगति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश हर क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर अपना महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता व मातृ मृत्यु दर में कमी में भी हम देश में अपना स्थान प्राप्त करेंगे। अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में रीवा पहला संभागीय मुख्यालय होगा जिसके चारो ओर रिंग रोड व वायपास की सुविधा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुंबई के टाटा अस्पताल की तरह ही सुविधायुक्त कैंसर अस्पताल निर्माणाधीन है और रीवा मेडिकल हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कार्यशाला में डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि उप मुख्यमंत्री के प्रयासों से रीवा में स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह कार्यशाला उन्हीं के निर्देश पर आयोजित हो रही है जो मातृ मृत्यु दर को कम करने में सहायक होगी। विभागाध्यक्ष प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग डॉ. पद्मा शुक्ला ने कहा कि कार्यशाला में किये गये विचार मंथन से चिकित्सकों व मैदानी अमले को लाभ मिलेगा और रीवा जिले में मातृ मृत्यु दर को कम से कम करने में सफलता मिलेगी। कार्यशाला में डॉ. नरेश बजाज, डॉ. शशि जैन, संयुक्त संचालक डॉ. अवधिया, अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा सहित चिकित्सक उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे