दमोह के छह राजस्व न्यायालयों में गड़बड़ियां, तहसीलदार निलंबित; एसडीएम हटाए गए

 


अधिकारिता के बिना आदेश, सुनवाई का अवसर दिए बगैर आवेदन निरस्त करने और जुर्माना वसूले बिना प्रकरण बंद करने के मामले आए सामने; सात अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस

दमोह,मध्य प्रदेश, 10 अक्टूबर (हि.स.) मध्य प्रदेश के दमोह जिले में राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को लेकर मिल रही लगातार शिकायतों के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। तहसील दमोह के छह राजस्व न्यायालयों की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर दमयंती नगर तहसीलदार रोबिन जैन और संबंधित रीडर को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, एसडीएम सौरभ गंधर्व को वर्तमान पद से हटाकर दूसरी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जांच में नियमों के उल्लंघन के साथ सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है। इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और पुराने शिकायत प्रकरणों की समीक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने शनिवार, 10 अक्टूबर को बताया कि जनसुनवाई के दौरान राजस्व प्रकरणों के निराकरण में अनियमितताओं और लोगों को हो रही परेशानियों की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदार स्तर के अधिकारियों से राजस्व न्यायालयों की जांच कराई गई। जांच में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन नहीं किया गया था।

अधिकारिता के बिना आदेश, सुनवाई का अवसर भी नहीं

जांच में सामने आया कि कुछ प्रकरणों में संबंधित अधिकारियों ने अधिकारिता के बिना आदेश पारित किए। कुछ मामलों में पक्षकारों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना ही आवेदन निरस्त कर दिए गए। इसके अतिरिक्त, जुर्माने की राशि जमा कराए बिना प्रकरणों को बंद कर नस्तीबद्ध करने की अनियमितता भी सामने आई है। राजस्व न्यायालयों में इस तरह की कार्यप्रणाली से प्रभावित पक्षकारों के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

जुर्माने की वसूली किए बिना प्रकरण बंद किए जाने का मामला वित्तीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इससे शासन को राजस्व की संभावित क्षति होने की आशंका जताई गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऐसे प्रकरणों की दोबारा समीक्षा कर बकाया राशि की वसूली की जाती है या नहीं। साथ ही, जिन लोगों के मामले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना निरस्त किए गए, उन्हें राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव

सागर संभागायुक्त की ओर से 9 अक्टूबर को जारी आदेश के तहत तहसीलदार रोबिन जैन को निलंबित किया गया है। संबंधित रीडर पर भी निलंबन की कार्रवाई की गई है। एसडीएम सौरभ गंधर्व को वर्तमान पद से हटाकर उप जिला निर्वाचन अधिकारी (सामान्य) एवं स्थानीय निर्वाचन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रभारी डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार दुबे को एसडीएम दमोह बनाया गया है। वहीं, नायब तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी को दमयंती नगर तहसीलदार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। जांच के सिलसिले में सात अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि शिकायतों के आधार पर राजस्व न्यायालयों के कामकाज की जांच को गंभीरता से लिया गया है।

पुराने मामलों की जांच पर भी निगाहें

इस कार्रवाई के बाद दमोह में पूर्व में पदस्थ रहे कुछ अधिकारियों के कार्यकाल से जुड़े पुराने प्रकरण भी चर्चा में हैं। सूत्रों के अनुसार, स्थानांतरित हो चुके कुछ अधिकारियों के विरुद्ध भी शिकायतें मिलने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इन शिकायतों की वर्तमान स्थिति, जांच की प्रगति और उन पर हुई कार्रवाई को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कुछ सूत्र पुराने मामलों को लेकर दमोह से भोपाल तक कथित सक्रियता और जांच को प्रभावित करने के प्रयासों की चर्चा भी कर रहे हैं। इन चर्चाओं में एक महिला अधिकारी का उल्लेख किया जा रहा है, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय संबंधित अभिलेखों, शिकायतों और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।

इसी तरह, राजस्व न्यायालयों में मिली अनियमितताओं के पीछे प्रक्रियागत लापरवाही थी या जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई, इसका निर्धारण भी जांच से ही हो सकेगा। किसी भू-माफिया, राजनीतिक प्रभाव या कथित बिचौलियों की भूमिका को लेकर भी फिलहाल कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे किसी भी दावे की पुष्टि संबंधित प्रकरणों के दस्तावेजों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही की जा सकती है।

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आमजन के राजस्व प्रकरणों का निराकरण समय-सीमा के भीतर पारदर्शी और विधिसम्मत तरीके से किया जाए। नागरिकों को अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। अब प्रशासन के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां हैं, अनियमितताओं वाले प्रकरणों की समीक्षा, शासन को हुई संभावित वित्तीय क्षति का आकलन और प्रभावित पक्षकारों को नियमानुसार राहत देना। इसके साथ ही पुराने शिकायत प्रकरणों की स्थिति स्पष्ट करना भी आवश्यक होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव