दमोहः कलेक्टर, एसपी और जिला न्यायालय में हेलमेट अनिवार्य करने के निर्देश
दमोह, 24 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह में शुक्रवार को सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक में उच्चतम न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और जिले को जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि कलेक्टर कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जिला न्यायालय सहित जिले के सभी सरकारी कार्यालयों में हेलमेट पहनकर आने की व्यवस्था अनिवार्य की जाए। बिना हेलमेट आने वाले कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज न करने जैसे कड़े कदम उठाने की भी सलाह दी गई। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी स्वयं यातायात नियमों का पालन करेंगे तो समाज में भी इसका सकारात्मक संदेश जाएगा।
बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव, पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज (वरिष्ठ खंड) उषाकांता कृषाण, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रवीण फुलपगारे, अपर कलेक्टर राकेश मोहन त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने कहा कि देश के 758 जिलों में अब तक कोई भी जिला जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट बनने की चुनौती स्वीकार नहीं कर पाया है। उन्होंने दमोह प्रशासन से इस दिशा में प्रभावी पहल करने का आह्वान करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत केवल एक आंकड़ा नहीं होती, बल्कि पूरा परिवार उसके दुष्परिणाम भुगतता है। इसलिए दुर्घटनाओं को रोकना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिले के सभी स्कूलों और महाविद्यालयों में हेलमेट के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही जिले में कार्यरत कंपनियां और सामाजिक संस्थाएं अपने सीएसआर फंड के माध्यम से हेलमेट वितरण और सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान संचालित करें। प्रत्येक वाहन में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट, वैध ड्राइविंग लाइसेंस, बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेज सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा कि सड़क सुरक्षा समिति की बैठक केवल औपचारिकता न बने, बल्कि नियमित समीक्षा कर दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण किया जाए और जहां भी सड़क डिजाइन, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था या अन्य कमियां हों, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। उन्होंने बताया कि छह माह बाद वह स्वयं पुनः दमोह आकर सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों की समीक्षा करेंगे और यह देखेंगे कि जिले ने जीरो फैटलिटी के लक्ष्य की दिशा में कितना कार्य किया है।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बैठक में विश्वास दिलाया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी निर्देशों का गंभीरता से पालन कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि सड़कों से आवारा गौवंश हटाने, सड़क डिजाइन में सुधार करने और दुर्घटना संभावित स्थानों पर आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास रहेगा कि जिले में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में अधिकतम कमी लाई जा सके।
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने बताया कि जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। अब तक 14 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां सुधार कार्य किए जा रहे हैं। भोपाल की मैनिट टीम द्वारा निरीक्षण के बाद प्राप्त सुझावों के अनुसार आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं। इसके अलावा बिना हेलमेट वाहन चलाने, ओवरस्पीड, ड्रिंक एंड ड्राइव तथा अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमित चालानी कार्रवाई की जा रही है।
बैठक के दौरान यातायात थाना प्रभारी दलबीर सिंह मार्कों ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से जिले के ब्लैक स्पॉट, दुर्घटनाओं के आंकड़े, किए गए सुधार कार्यों तथा सड़क सुरक्षा अभियान की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
बैठक के अंत में न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने सभी अधिकारियों से सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि प्रशासन, पुलिस, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर यातायात नियमों का पालन करें तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है और दमोह देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव