75 साल की मां बनी बेटी की जिंदगी की उम्मीद, किडनी दान कर पेश की ममता की मिसाल

 


दमोह, 11 मई (हि.स.)। मध्यप्रदेश के दमोह से मां के अटूट प्रेम और त्याग की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। यहां 75 वर्षीय मनोरमा असाटी ने अपनी गंभीर रूप से बीमार बेटी को नया जीवन देने के लिए अपनी किडनी दान कर दी। सफल ट्रांसप्लांट के बाद मां और बेटी दोनों स्वस्थ हैं और इस साहसिक फैसले की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।

जानकारी के अनुसार दमोह निवासी कंचन असाटी पिछले करीब दस वर्षों से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। समय के साथ उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं और उन्हें नियमित डायलिसिस कराना पड़ रहा था। लगातार इलाज, अस्पतालों के चक्कर और बढ़ते खर्च ने परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद परेशान कर दिया था।

परिवार ने इलाज के लिए दिल्ली, इंदौर, हैदराबाद और हरियाणा समेत कई बड़े शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क किया। जांच और सलाह के बाद डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि किडनी ट्रांसप्लांट ही कंचन की जिंदगी बचाने का एकमात्र रास्ता है।

हालांकि सबसे बड़ी मुश्किल उपयुक्त डोनर की थी। काफी कोशिशों के बाद भी कोई समाधान नहीं निकल पा रहा था। ऐसे कठिन समय में कंचन की मां मनोरमा असाटी ने खुद अपनी किडनी देने का फैसला किया।

डॉक्टरों ने शुरुआत में उनकी उम्र को देखते हुए इस प्रक्रिया को जोखिमभरा बताया। चिकित्सकों के मुताबिक 75 वर्ष की उम्र में किडनी डोनेट करना आसान नहीं होता और इससे कई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं। लेकिन मनोरमा असाटी अपनी बेटी को बचाने के फैसले पर अडिग रहीं।

इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने उनकी विस्तृत मेडिकल जांच की। सभी रिपोर्ट अनुकूल आने के बाद ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की गई। ऑपरेशन सफल रहा और कंचन असाटी को नया जीवन मिल गया। फिलहाल मां और बेटी दोनों डॉक्टरों की निगरानी में स्वस्थ हैं।

परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक यह संघर्ष सिर्फ बीमारी तक सीमित नहीं था। वर्ष 2024 में कंचन के पति डॉ. अमित आनंद असाटी का निधन हो गया था। पति के जाने के बाद बीमारी और बच्चों की जिम्मेदारी ने हालात और मुश्किल बना दिए थे। ऐसे समय में मनोरमा असाटी ने पूरे परिवार को संभाला और बेटी के इलाज में सबसे बड़ी ताकत बनकर खड़ी रहीं।

इस घटना के सामने आने के बाद शहरभर में मनोरमा असाटी के साहस और ममता की सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक मेडिकल ट्रांसप्लांट नहीं, बल्कि मां के निस्वार्थ प्रेम और त्याग की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को भावुक कर देती है।

हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव