मप्रः निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीन आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, 25 सितंबर तक पेश करने के निर्देश

 


जबलपुर, 19 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के कुठला थाना क्षेत्र के चर्चित जमीन सौदा मामले में निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला न्यायालय ने नेहा पच्चीसिया समेत क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ अलग-अलग गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। वारंट शुक्रवार शाम को जारी किए गए। पुलिस को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

मामला कुठला थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 738/2026 से जुड़ा है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। एसआईटी द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास के बीच जिला न्यायालय में वारंट के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था।

नेहा पच्चीसिया ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में याचिका दायर की है। मामले में जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और मामले में अंतरिम राहत के सवाल पर आगे सुनवाई होनी है।

नेहा पच्चीसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे और अधिवक्ता प्रियंक अग्रवाल ने दलील दी है कि उन्हें मामले में दुर्भावना के तहत फंसाया गया है। बचाव पक्ष का कहना है कि एफआईआर में उनकी कोई सीधी आपराधिक भूमिका या अन्य आरोपियों के साथ सांठगांठ स्पष्ट नहीं होती। याचिका में यह भी कहा गया है कि वह दो छोटे बच्चों की एकल अभिभावक हैं और कार्रवाई के कारण पारिवारिक जिम्मेदारियां प्रभावित हो रही हैं।

पुलिस ने नेहा पच्चीसिया समेत आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस ने विदेश जाने की आशंका को देखते हुए लुकआउट संबंधी कार्रवाई भी शुरू की है।

नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत अर्जी कटनी की सत्र अदालत से पहले ही खारिज हो चुकी है। अभियोजन ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और पुलिसकर्मियों के बयानों के आधार पर उनकी भूमिका पर सवाल उठाए थे। अदालत के समक्ष यह भी कहा गया था कि नेहा पच्चीसिया और सह-आरोपी क्षितिज राज बारापात्रे एक ही मकान में रहते थे।

मामला कुठला थाना क्षेत्र में हत्या के एक आरोपी को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने और जमीन के सौदे से जुड़ा है। शिकायत और जांच से जुड़े आरोपों के मुताबिक, हत्या के मामले में चालान पेश करने में देरी के बाद आरोपी पक्ष पर कथित दबाव बनाया गया और करीब एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन को लगभग 18 लाख रुपये में दूसरे व्यक्ति के नाम कराने का आरोप है।

पुलिस जांच में जमीन की रजिस्ट्री, बैंक लेनदेन और आरोपियों के बीच कथित संपर्क समेत कई बिंदुओं की जांच की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक