भ्रष्टाचार के मामलों में कम सजा पर जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, कहा- लोकायुक्त में 1,063 मामले दर्ज, सजा केवल 7 में

 


भोपाल, 01 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों और उनमें दोषसिद्धि की कम दर को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लोकायुक्त में दर्ज मामलों और उनमें हुई सजा के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार से भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

जीतू पटवारी ने मंगलवार काे जारी मीडिया में अपने बयान में कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लोकायुक्त में 1,063 आपराधिक मामले दर्ज हुए, लेकिन इनमें केवल सात मामलों में सजा हुई। उनके मुताबिक इससे भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और उनके अभियोजन की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई केवल प्राथमिकी दर्ज करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दोष सिद्ध होने तक प्रभावी पैरवी और समयबद्ध प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

‘अभियोजन मंजूरी में देरी खत्म हो’

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कई मामलों में अभियोजन की मंजूरी और आगे की कानूनी प्रक्रिया में लंबे समय तक लगने से कार्रवाई प्रभावित होती है। उन्होंने सरकार से लंबित मामलों की समीक्षा कर आवश्यक अभियोजन स्वीकृतियां समयबद्ध तरीके से देने और जांच एजेंसियों को प्रभावी कार्रवाई के लिए पर्याप्त सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की। पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सवाल किया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था किस तरह काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई में देरी से आम लोगों के बीच व्यवस्था को लेकर भरोसा प्रभावित हो सकता है।

‘जीरो टॉलरेंस नीति का असर कार्रवाई में दिखे’

पीसीसी चीफ पटवारी ने कहा कि सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी नीति को केवल घोषणाओं तक सीमित न रखते हुए लंबित मामलों के निपटारे पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मामलों की जांच, अभियोजन की मंजूरी और न्यायालय में प्रभावी पैरवी की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को दूर करना जरूरी है।

उन्होंने मांग की कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की स्थिति, लंबित अभियोजन स्वीकृतियों और दोषसिद्धि से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, ताकि सरकार की कार्रवाई और उसकी प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे