अनूपपुर: ईवीएम चोरी पर कांग्रेस हुई आक्रामक, प्रदर्शन कर जांच की मांग की
अनूपपुर, 02 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में अनूपपुर की पुरानी तहसील कार्यालय की इमारत ढहाने के दौरान 24 ईवीएम मशीनों के गायब होने पर राजनीति गरमा गई है। एक तरफ जहां जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस अक्रमक हो गई हैं। शुक्रवार को गांधी जयंती के मौके पर सड़कों पर उतरकर मोर्चा खोल दिया। वहीं पुलिस भी चोरी हुई ईवीएम का सुराग लगाने के लिए स्थानीय कबाड़ियों की सूची बनाकर उनसे लगातार पूछताछ कर रही है।
शुक्रवार दोपहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 'ईवीएम चोर गद्दी छोड़' के बैनर और नारों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। रैली निकालकर कांग्रेस ने सरकार और प्रशासन से सवाल पूछे। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मामला सिर्फ 24 ईवीएम का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सुरक्षा और निगरानी का है कि आखिर इतनी संवेदनशील सामग्री गायब कैसे हो गई। जिला कांग्रेस अध्यक्ष गुड्डू सिंह चौहान के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय से स्टेट बैंक मार्ग होते हुए कोतवाली तिराहे तक पैदल मार्च निकाला।
गुड्डू सिंह चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के जनादेश की पवित्रता सबसे ऊपर है। अनूपपुर में ईवीएम को लेकर जो शंकाएं खड़ी हुई हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सच जनता के सामने आना चाहिए। जब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, कांग्रेस आंदोलन जारी रखेगी। ज्ञात हो कि पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने ईवीएम वेयरहाउस वाली बिल्डिंग को हाल ही में तोड़ा जा रहा था। ढहाने के काम के दौरान वेयरहाउस की दीवार टूटी मिली। ठेकेदार ने जब अधिकारियों को सूचना दी, तब कहीं जाकर ईवीएम मशीनों को पॉलिटेक्निक कॉलेज में शिफ्ट किया गया। सत्यापन के दौरान 24 मशीनें कम पाई गईं, जिनमें 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट शामिल हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि 20 अगस्त को ही खुले में ईवीएम पड़े होने की सूचना मिल गई थी, लेकिन मशीनों को 21 सितंबर को शिफ्ट किया गया। यानी अधिकारियों को ईवीएम हटाने में पूरा एक महीना लग गया। 24 से 28 सितंबर के बीच हुई जांच में यह चोरी पकड़ में आई, जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया।
इससे सुरक्षा व्यवस्था और अधिकारियो एवं चुनाव आयोग के प्रोटोकॉल और प्रशासनिक कार्यशैली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जब वेयरहाउस में ईवीएम सील थीं, तो वहां सुरक्षा गार्ड तैनात क्यों नहीं थे? राजनीतिक दलों की मौजूदगी और प्रशासनिक तालमेल के बिना वेयरहाउस के गेट से सीसीटीवी कैमरे कैसे हटा दिए गए? बिना इमारत की जांच किए और सामान खाली कराए पीडब्ल्यूडी ने डिस्मेंटल सर्टिफिकेट कैसे जारी कर दिया? ठेकेदार की सूचना मिलने के बाद भी अधिकारियों को ईवीएम सुरक्षित जगह ले जाने में 1 महीने का वक्त क्यों लगा?।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला