अनूपपुर: शिक्षा व्यवस्था और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ 'छात्रों की गूंज' अभियान चलाएगी कांग्रेस

 


अनूपपुर, 24 जून (हि.स.)। कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी अभियान 'छात्रों की गूंज' के तहत बुधवार को कांग्रेस भवन में नेताओं ने पत्रकार वार्ता कर शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार का घेराव किया इस अवसर पर कहा गया कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था युवाओं को अवसर देने के बजाय उन्हें निराशा और असुरक्षा की ओर धकेल रही है।

इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्याम कुमार उर्फ गुडृडू चौहान, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष जिलाध्यक्ष रमेश सिंह, जैतहरी ब्लाक अध्यक्ष रजन राठौर, काग्रेस आशीष त्रिपाठी, युवा कांग्रेस अध्यक्ष मानवेन्द्र मिश्रा, रफी अहमद, पार्षद मोहम्मद रियाज, पूर्व पार्षद पुरुषोत्तम चौधरी उपस्थित रहे।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्याम कुमार उर्फ गुडृडू चौहान बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा कोटा से शुरू किए गए 'छात्रों की गूंज' अभियान का उद्देश्य देशभर के छात्रों और अभिभावकों की आवाज को मंच देना है। उन्होंने कहा कि आज छात्र और उनके माता-पिता शिक्षा व्यवस्था से परेशान हैं। पेपर लीक की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, सरकारी स्कूल बंद होते जा रहे हैं और निजी शिक्षण संस्थानों की बढ़ती फीस ने मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाल दिया है।

उन्होंने कहा कि, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के लिए कई अभिभावक कर्ज और लोन तक लेने को मजबूर हैं, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद रोजगार की कोई गारंटी नहीं है। यही कारण है कि युवाओं में तनाव बढ़ रहा है और कई छात्र आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि यह मौजूदा व्यवस्था की विफलता है और इसमें व्यापक सुधार की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लाखों छात्र शामिल होते हैं, लेकिन सफलता का प्रतिशत बेहद कम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि 3000 छात्र किसी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होते हैं तो उनमें से केवल एक छात्र आईएएस बन पाता है, जबकि बहुत कम संख्या में छात्र डॉक्टर या अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंच पाते हैं। ऐसे में अधिकांश युवाओं के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आती।

शिक्षा व्यवस्था 'सिलेक्शन' नहीं, 'रिजेक्शन सिस्टम' बन गई

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष जिलाध्यक्ष रमेश सिंह ने कहा कि देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था अब चयन (सिलेक्शन) का नहीं बल्कि असफल घोषित करने (रिजेक्शन) का सिस्टम बन चुकी है। राहुल गांधी द्वारा कोटा में छात्रों से किए गए संवाद में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि यूपीएससी, नीट, जेईई, एसएससी और रेलवे जैसी प्रमुख परीक्षाओं में लाखों छात्र मेहनत करते हैं, लेकिन उनमें से बेहद कम को अवसर मिल पाता है।

उन्होंने कहा कि यदि 1000 विद्यार्थियों की बात करें तो उनमें से केवल 12 छात्रों को ही ऐसी नौकरी मिल पाती है जिसे सुरक्षित और स्थायी रोजगार कहा जा सके। बाकी युवाओं के भविष्य को लेकर कोई ठोस योजना दिखाई नहीं देती। यह स्थिति देश के युवाओं के लिए चिंता का विषय है।

25 जून को 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत 25 जून को अनूपपुर में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा हैं। इसमें जिलेभर के छात्रों, युवाओं और अभिभावकों को आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सुझाव लिए जाएंगे। छात्र वेबसाइट और क्यूआर कोड के माध्यम से भी अपने सुझाव दर्ज करा सकेंगे। इन सुझावों के आधार पर कांग्रेस नई शिक्षा नीति और युवाओं के भविष्य को लेकर वैकल्पिक मॉडल तैयार करने की दिशा में काम करेगी।

छात्र संगठनों की भूमिका पर भी उठाए सवाल

पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने छात्र राजनीति से जुड़े संगठनों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सत्ता समर्थित छात्र संगठन मौन बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के हितों की आवाज उठाने के बजाय ये संगठन सरकार की नीतियों पर सवाल करने से बच रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला