बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब

 


जीतू पटवारी बोले- स्वास्थ्य सेवाएं गांव तक पहुंच रही हैं तो बीमार बच्चे समय पर अस्पताल क्यों नहीं पहुंचे?

बालाघाट, 15 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में उपचार में देरी के बीच आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था और कुपोषण की स्थिति पर जवाब मांगा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने मंगलवार को बालाघाट पहुंचकर मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात की और अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। इसके बाद आयोजित जनसभा में पटवारी ने घटना को लेकर सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

जीतू पटवारी ने कहा कि यदि स्वास्थ्य सेवाएं गांवों तक पहुंच रही हैं, तो बीमार बच्चे समय पर अस्पताल क्यों नहीं पहुंचे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन को पहले से स्थिति की जानकारी थी, तो गंभीर स्थिति बनने से पहले रोकथाम के प्रयास क्यों नहीं किए गए। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि आदिवासी बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में किस स्तर पर है।

कुपोषण के आंकड़ों का हवाला देकर सवाल

पीसीसी चीफ पटवारी ने कहा कि बालाघाट की घटना को केवल एक जिले तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, कुपोषण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा का विषय है। उन्होंने शासन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि चार गांवों में 6,431 बच्चों की जांच में 1,049 बच्चे कुपोषित पाए गए। वहीं 1,21,892 बच्चों की पोषण जांच में 3,741 बच्चे अति-कुपोषित और 15,588 बच्चे सामान्य कुपोषित पाए गए।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कुपोषण दूर करने के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन इनका प्रभाव जमीनी स्तर पर कितना है, इसकी समीक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में विधायक विक्रांत भूरिया द्वारा कुपोषण से जुड़े सवाल उठाए जाने के बावजूद समस्या के समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना दिखाई नहीं दे रही है।

लापरवाही की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बच्चों की मौत के मामले में परिजनों को केवल सांत्वना देने के बजाय घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि बच्चों को समय पर उपचार क्यों नहीं मिला, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाएं कहां कमजोर पड़ीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। पटवारी ने कहा कि बालाघाट की घटना आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था की स्थिति पर गंभीरता से विचार करने का अवसर है। कांग्रेस ने कहा कि वह इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाती रहेगी।

कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे, विधायक ओंकार मरकाम, विकी पटेल, रजनीश सिंह, नारायण पट्टा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक संजय उइके सहित पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे