अनूपपुर: मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर पत्रकारवर्ता कर कांग्रेस ने उठाए सवाल
अनूपपुर, 14 जून (हि.स.)। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला अब एक बड़े सियासी संग्राम में तब्दील हो चुका है। कांग्रेस इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं है और इसके खिलाफ ‘जनता की अदालत’ में उतरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली गई है।
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला कांग्रेस कार्यालय में रविवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने राज्यसभा चुनाव में पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप लगाया। इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया।
पत्रकार वार्ता में अनूपपुर जिले प्रभारी एवं पूर्व विधायक उमरिया अजय सिंह, जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्याम कुमार उर्फ गुडृडू चौहान, आशीष त्रिपाठी, एहसान अली अंसारी, युवा कांग्रेस अध्यक्ष मानवेन्द्र मिश्रा, सतेन्द्र स्वरूप दुबे, रफी अहमद उपस्थित रहे।
अनूपपुर जिले प्रभारी ने आरोप लगाया कि राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के निर्वाचन के लिए कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत था। इसके बावजूद, भाजपा ने कांग्रेस विधायकों को अपने पक्ष में करने की उम्मीद में तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा। जब यह प्रयास सफल नहीं हुआ, तो भाजपा ने मिथ्या आधार पर आपत्ति प्रस्तुत कर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करवा दिया। यह केवल एक उम्मीदवार के साथ अन्याय का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया, निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर प्रहार है। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में अवैध हस्तक्षेप को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उन्होंने मीनाक्षी नटराजन की छवि को गांधीवादी और जनसेवा के प्रति समर्पित नेता के रूप में वर्णित किया।
उन्होंने कहा कि जिस मामले में तथ्य छिपाने का आरोप लगाया गया है, ऐसा कोई आपराधिक प्रकरण मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध विचाराधीन नहीं है। उन्होंने दावा किया कि न तो किसी कोर्ट ने उनके विरुद्ध संज्ञान लिया है और न ही कोई अपराध दर्ज किया गया है। संबंधित कोर्ट द्वारा प्रकरण वापस किया जा चुका है, इसलिए नामांकन निरस्त करने का कोई वैधानिक आधार नहीं था।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भाजपा लगातार लोकतंत्र पर प्रहार कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में इससे और गंभीर चुनौतियां सामने आ सकती हैं, जिनका कांग्रेस लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से मुकाबला करेगी। साथ ही आरोप लगाया कि भाजपा संविधान की मर्यादाओं का हनन कर पूरी व्यवस्था को अपने नियंत्रण में करना चाहती है। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस आधार के बहुमत प्राप्त उम्मीदवार को चुनाव प्रक्रिया से बाहर करना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक कृत्य है। जिस मामले में तथ्य छिपाने का आरोप लगाया गया है, ऐसा कोई आपराधिक प्रकरण मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध विचाराधीन नहीं है। उन्होंने दावा किया कि न तो किसी कोर्ट ने उनके विरुद्ध संज्ञान लिया है और न ही कोई अपराध दर्ज किया गया है। संबंधित कोर्ट द्वारा प्रकरण वापस किया जा चुका है, इसलिए नामांकन निरस्त करने का कोई वैधानिक आधार नहीं था।
उन्होंने कहा कि इस तरह की तानाशाही किसी फिल्म में भी नहीं दिखाई दी है जिस तरह की भाजपा ने किया है। सर्वोच्च न्यायालय पर सवाल उठाते हुए कि न्यायालय किसके दबाव में यह किया है यह लोकतंत्र की हत्या है। चुनावी फॉर्म में नोटिस दर्शाने का कलाम कहीं नहीं है। जनप्रतिनिधित्व की धारा 33ए और फॉर्म 26 की व्यवस्था का उद्देश्य उन अपराधिक मामलो की जानकारी प्राप्त करना है जिसके विरुद्ध उम्मीदवार विधिवत आपराधिक कार्रवाई चल रही हो।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला