राहुल गाँधी भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास न करें : भाजपा
जबलपुर, 28 सितंबर (हि.स.)। पिछले कुछ समय से कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग, एसआईआर और मतदाता सूची को लेकर लगातार गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों के माध्यम से देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के मन में भ्रम और अविश्वास पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन अब चुनाव आयोग ने स्वयं इस पूरे मामले पर स्पष्ट स्थिति सामने रख दी है।
यह बात जबलपुर में महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने सोमवार को सांसद आशीष दुबे, प्रदेश कोषाध्यक्ष अखिलेश जैन, जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, ग्रामीण अध्यक्ष राजकुमार पटेल, विधायक अशोक रोहाणी, प्रदेश मीडिया सह प्रभारी श्रीकान्त साहू, प्रदेश प्रवक्ता डॉ वाणी अहलुवलिया की उपस्थिति में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए संभागीय भाजपा कार्यालय रानीताल में कही।
महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने कहा कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग की बैठक हुई और तीनों चुनाव आयुक्तों की ओर से संयुक्त रूप से स्पष्ट किया गया कि देशभर में चल रही एसआईआर किसी एक व्यक्ति का निर्णय नहीं है। यह मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय है। ऐसे में सवाल यह है कि जब देश की संवैधानिक संस्था ने स्वयं पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी है, तो राहुल गांधी और कांग्रेस अब भी किस आधार पर इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं?
महापौर सिंह ने कहा राहुल गांधी ने जिस मीडिया रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर सवाल खड़े किए, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद उस रिपोर्ट की तथ्यात्मकता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
उन्होंने कहा राजनीतिक दलों से अपेक्षा होती है कि वे किसी संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पूरी जांच करें। सिर्फ किसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाना और फिर उसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ एक बड़े मुद्दे के रूप में प्रस्तुत करना क्या उचित है?
महापौर ने कहा राहुल गाँधी द्वारा एसआईआर प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 से जुड़ी घोषणा को लेकर भी सवाल उठाए गए। दस्तावेज़ के अनुसार, 27 मई 2026 को माननीय सुप्रीम कोर्ट इसको वैध ठहरा चुका है। तो फिर फॉर्म-6 में मनमाने बदलाव किए जाने का आरोप किस आधार पर लगाया जा रहा है?
महापौर ने कहा यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा किसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हों। 2024 में ईवीएम को 'ब्लैक बॉक्स' बताकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाया। 2019 में 'चौकीदार चोर है' बयान पर सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। 2016-2022 में कांग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी ने सेना का अपमान करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांग कर , 'खून की दलाली' कहना और तवांग झड़प पर सेना का मनोबल गिराने का कृत्य किया गया। राहुल गाँधी ने विदेशों में देश की बदनामी करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों (कैम्ब्रिज, अमेरिका) पर जाकर भारतीय न्यायपालिका और लोकतंत्र को कटघरे में खड़ा करने का कार्य किया।
महापौर ने कहा लोकतंत्र में सरकार या किसी संस्था के निर्णय से असहमति रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन असहमति और संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने के प्रयास के बीच अंतर होना चाहिए। राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
महापौर ने कहा आज हम कांग्रेस और राहुल गांधी से कुछ सीधे सवाल पूछना चाहते हैं। उन्होंने कहा जब चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं, तो राहुल गांधी इस स्पष्ट जवाब के बाद भी अपने आरोपों पर कायम क्यों हैं?
उन्होंने राहुल गाँधी से पूछा क्या किसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाना और फिर उसी आधार पर जनता के बीच भ्रम पैदा करना उचित है? उन्होंने कहा क्या कांग्रेस चुनाव आयोग सहित देश की संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास करती है या नहीं? और यदि चुनाव आयोग ने तथ्यों के साथ अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है, तो क्या राहुल गांधी देश के सामने अपने पहले लगाए गए आरोपों पर पुनर्विचार करेंगे?
भाजपा जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने कहा राहुल गाँधी ज़ी चुनाव जनता के बीच सेवा करने और जनमत से जीते जाते हैं, देश की संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता के मन में अविश्वास पैदा करके नहीं। अब समय है कि कांग्रेस और राहुल गांधी भी देश के सामने यह स्पष्ट करें कि वे चुनाव आयोग के सर्वसम्मत निर्णय, न्यायपालिका के निर्णय और देश की संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास करते हैं या नहीं करते है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक