आरजीपीवी का नाम बदले जाने के फैसले पर कांग्रेस हमलावर, कमलनाथ बोले- नाम बदलने से इतिहास नहीं बदलेगा
भोपाल, 02 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्था राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) का स्वरूप अब बदलने जा रहा है। राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय के पुनर्गठन को मंजूरी देते हुए इसे तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों में बांटने का फैसला किया है। इसके साथ ही मौजूदा विश्वविद्यालय के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम भी हट जाएगा। सरकार के अनुसार, इस पुनर्गठन का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा के प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना और क्षेत्रीय स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत करना है। वहीं, कांग्रेस ने इस फैसले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक आरजीपीवी को मध्य भारत, मालवा और महाकौशल क्षेत्र के लिए तीन विश्वविद्यालयों में विभाजित किया जाएगा। प्रस्तावित विश्वविद्यालयों के नाम मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय और महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय होंगे। इनके केंद्र क्रमश: भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में प्रस्तावित हैं।
585 संस्थानों और 3.83 लाख से अधिक विद्यार्थियों पर असर
आरजीपीवी से वर्तमान में प्रदेश के 55 जिलों के करीब 585 संस्थान और 3.83 लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े होने का दावा कांग्रेस ने किया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उद्देश्य तकनीकी शिक्षा में सुधार और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण है, तो विश्वविद्यालय का नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी। पटवारी ने सरकार से पूछा कि तीन नए विश्वविद्यालयों के गठन का खर्च कौन उठाएगा और इससे विद्यार्थियों, कर्मचारियों तथा विश्वविद्यालय की संपत्तियों की व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बजाय संस्थान की पहचान बदलने में लगी है। जीतू पटवारी ने चेतावनी दी कि कांग्रेस इस फैसले को लेकर सरकार से जवाब मांगेगी।
कमलनाथ बोले- नाम बदलने से इतिहास नहीं बदलेगा
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरजीपीवीसे राजीव गांधी का नाम हटाने के फैसले को भाजपा सरकार की ‘ओछी मानसिकता’ बताया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के कार्यकाल में भारत ने आधुनिक तकनीक, सूचना क्रांति और कंप्यूटर के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए थे। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार कांग्रेस शासनकाल में स्थापित संस्थानों और योजनाओं के नाम बदलने में लगी है। उन्होंने सरकार से विश्वविद्यालय के नाम से राजीव गांधी का नाम नहीं हटाने की मांग की। कमलनाथ ने कहा कि **नाम बदलकर इतिहास नहीं बदला जा सकता और हर अच्छे-बुरे काम का हिसाब होता है।**
उमंग सिंघार ने पूछा- क्या विकास का मतलब सिर्फ नाम बदलना है?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने देश में सूचना प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर क्रांति की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में उनके नाम से संचालित विश्वविद्यालय से उनका नाम हटाना उचित नहीं है।
सिंघार ने सवाल किया कि क्या भाजपा सरकार के लिए विकास का मतलब केवल संस्थानों के नाम बदलना और उनका पुनर्गठन करना रह गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है, लेकिन इसके लिए संस्थानों की पहचान मिटाने की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे