देवास से रेस्क्यू किए गए बाघ 'युवराज' की हालत में सुधार, वन विहार में चल रहा उपचार
भोपाल, 29 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के देवास जिले की ख्योनी वन्यजीव अभयारण्य से गंभीर रूप से घायल अवस्था में रेस्क्यू किए गए वयस्क बाघ 'युवराज' की सेहत में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। भोपाल स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में उसे सघन चिकित्सकीय निगरानी में रखकर उपचार किया जा रहा है।
वन विहार प्रबंधन के अनुसार, युवराज का जन्म ख्योनी अभयारण्य में हुआ था। लगभग दो वर्ष की आयु से वह अभयारण्य के पर्यटन क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वह बाघिन राधा और मीरा के साथ अपना क्षेत्र साझा करता था।
जानकारी के अनुसार, जून के तीसरे सप्ताह में एक युवा बाघ के युवराज के क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद दोनों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर संघर्ष हुआ। इस दौरान हुई भिड़ंत में युवराज गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और वह चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गया। हालात को देखते हुए वन विभाग ने उसका रेस्क्यू कर भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान पहुंचाया।
वन विहार लाए जाने के छह दिन बाद विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों ने उसे बेहोश कर विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया। एक्स-रे और चिकित्सकीय जांच में उसके दोनों अगले पैरों की हड्डियों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। इसके अलावा दोनों अगले पैरों तथा बाएं पिछले पैर पर गहरे घाव मिले। बाएं पिछले पैर के गंभीर घाव पर छह टांके लगाए गए।
वन विहार की सहायक संचालक के मुताबिक रेस्क्यू के बाद से ही बाघ की लगातार निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम नियमित उपचार कर रही है और उसकी स्वास्थ्य स्थिति में अब धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा