भक्तामर स्तोत्र के सामूहिक पाठ से गूंजा मंदसौर, विश्व कल्याण और शांति की कामना
मंदसौर, 9 अक्टूबर (हि.स.)। भक्तामर महास्तोत्र विश्व दिवस पर शुक्रवार को मंदसौर में सकल जैन समाज की ओर से सामूहिक भक्तामर स्तोत्र पाठ का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबियों ने एक स्वर में स्तोत्र का पाठ कर विश्व कल्याण, सामाजिक सद्भाव, शांति और मंदसौर की निरंतर तरक्की की कामना की। आयोजन में जैन समाज के विभिन्न समुदायों के संतों के साथ श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए।
कार्यक्रम जीवागंज स्थित श्री जैन दिवाकर मूल तपो भवन स्थानक के सभागृह में आयोजित किया गया। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के कारण पूरा सभागृह खचाखच भरा रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दिगंबर जैन मुनिराज श्री शुद्धसागरजी महाराज के मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद श्वेतांबर जैन आचार्य श्रीमद विजय सागरचंद्रसागर सूरीश्वरजी महाराज ने नवकार मंत्र और मांगलिक पाठ कराया।
सकल जैन समाज के अध्यक्ष लोकेन्द्र जैन गोटावाला और आयोजन संयोजक सुरेन्द्र लोढ़ा ने नवकार की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। समारोह का संचालन डॉ. राजकुमार बाकलीवाल ने किया, जबकि स्थानक अध्यक्ष राजूभाई संचेती ने उपस्थित श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
कार्यक्रम में भक्तामर स्तोत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सकल जैन समाज के अध्यक्ष लोकेन्द्र जैन और संयोजक सुरेन्द्र लोढ़ा ने इसके धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व की जानकारी दी। इसके बाद पंडित श्री अरविन्द जैन और श्रीमती सुधा पाटनी ने भक्तामर स्तोत्र के पाठ की शुरुआत की। उनके स्वर के साथ सभागृह में मौजूद सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से स्तोत्र का पाठ किया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तामर स्तोत्र के माध्यम से समाज में सद्भाव, शांति और सुख-समृद्धि की कामना की। सामूहिक पाठ में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता रही।
समारोह को संबोधित करते हुए जैनाचार्य श्री सागरचंद्रसागर सूरीश्वरजी महाराज ने भक्तामर स्तोत्र की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि आचार्य मानतुंगसूरिजी ने भगवान आदिनाथ की स्तुति में 48 गाथाओं वाले इस काव्य की रचना की। इसका पाठ और अध्ययन श्रद्धालुओं के लिए आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
त्रिस्तुतिक मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी महाराज ने भक्तामर स्तोत्र को कल्पवृक्ष के समान बताया। उन्होंने कहा कि यह साधक को चिंताओं से मुक्त कर सुख, संतोष और हर्ष की अनुभूति प्रदान करता है।
हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया