सागरः कोल्ड्रिफ सिरप मामले में आईएमए ने संभागायुक्त को सौंपा ज्ञापन
सागर, 25 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के कोल्ड्रिफ कफ सिरप प्रकरण को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), सागर शाखा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को संभागायुक्त अनिल सुचारी से मुलाकात की और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। आईएमए ने प्रकरण में शीघ्र, निष्पक्ष और न्यायोचित हस्तक्षेप की मांग की है।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल ने संभागायुक्त को स्पष्ट किया कि इस दुखद घटना में जिन निर्दोष लोगों की जान गई है, उनके प्रति पूरी सहानुभूति है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और असली दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, आईएमए ने चिंता जताई कि केवल अपने चिकित्सकीय दायित्व का पालन करते हुए, सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त और अनुमोदित दवा का पर्चा लिखने वाले डॉक्टरों को आपराधिक अभियोजन का सामना करना पड़ रहा है, जो अनुचित है।
ज्ञापन में विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि डॉ. प्रवीण सोनी, डॉ. एस. एस. ठाकुर और डॉ. अमन सिद्दीकी अभी भी जेल में बंद हैं और न्याय का इंतजार कर रहे हैं। आईएमए ने मांग उठाई है कि प्रत्येक गिरफ्तार डॉक्टर की व्यक्तिगत भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों और विधिक प्रावधानों के आधार पर जांच हो। निर्दोष डॉक्टरों को अनावश्यक कारावास से तुरंत राहत दी जाए आदि।
आईएमए ने तर्क दिया कि संबंधित कफ सिरप का निर्माण लाइसेंसधारी कंपनी द्वारा किया गया था। यह दवा सभी गुणवत्ता परीक्षणों और नियामकीय स्वीकृतियों के बाद ही बाजार में बिक्री के लिए आई थी। डॉक्टरों ने सद्भावना में मरीजों की जरूरत के अनुसार इसका पर्चा लिखा। किसी भी डॉक्टर के पास निर्माण प्रक्रिया, रासायनिक शुद्धता या लैब टेस्ट करने का न तो वैधानिक अधिकार होता है और न ही कोई व्यावहारिक व्यवस्था।
डॉ. तल्हा साद ने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय जैकब मैथ्यू बनाम स्टेट ऑफ पंजाब (2005) का संदर्भ देते हुए कहा कि डॉक्टरों पर चिकित्सकीय लापरवाही या कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़े मामलों में सीधे आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके लिए तय न्यायिक मानकों और प्रक्रियात्मक सुरक्षा का पालन होना अनिवार्य है। आईएमए ने इस प्रकरण में भी इन गाइडलाइंस के पालन की स्वतंत्र समीक्षा करने की मांग की।
संभागायुक्त अनिल सुचारी ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि इस संवेदनशील विषय को राज्य सरकार एवं संबंधित सक्षम अधिकारियों के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा।
आईएमए ने दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी दोषी का बचाव करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि असली दोषियों (निर्माता व गुणवत्ता नियंत्रक) की जवाबदेही तय हो और केवल अपना फर्ज निभाने वाले निर्दोष डॉक्टरों को बलि का बकरा न बनाया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे