दमोह :मुख्यमंत्री लगाए जा रहे आरोपों का राज्य मंत्री लखन पटेल ने किया खंडन, बोले- तथ्य छिपाकर फैलाया जा रहा भ्रम

 


दमोह, 24 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं उनके परिवार की भूमि, संपत्तियों और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सामने आए आरोपों को प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री लखन पटेल ने बुधवार को विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए निराधार, भ्रामक और राजनीतिक प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध राजस्व अभिलेखों, सार्वजनिक दस्तावेजों और शपथ पत्रों के तथ्यों को नजरअंदाज कर भ्रम की स्थिति निर्मित करने का प्रयास किया जा रहा है।

राज्य मंत्री लखन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार के खिलाफ जिस प्रकार की खबरें प्रसारित की जा रही हैं, उनमें वास्तविक तथ्यों को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार की अधिकांश कृषि भूमि एवं संपत्तियां मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने से काफी पहले खरीदी जा चुकी थीं और इन्हें वर्तमान पद या सरकारी निर्णयों से जोड़ना पूरी तरह अनुचित है।

उन्होंने बताया कि नवंबर 2023 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्वामित्व एवं अधिपत्य में कुल 17.967 एकड़ कृषि भूमि दर्ज थी और जून 2026 तक इसमें कोई वृद्धि नहीं हुई है। इसी प्रकार उनकी पत्नी श्रीमती सीमा यादव के नाम दर्ज कृषि भूमि भी लगभग यथावत बनी हुई है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार परिवार की अधिकांश कृषि भूमि वर्ष 2008 से 2019 के बीच खरीदी गई थी, जब डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री नहीं थे।

राज्य मंत्री ने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें मुख्यमंत्री परिवार से जुड़ी एक निजी कंपनी के माध्यम से भूमि अर्जित करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि संबंधित कंपनी वर्ष 2008 में कृषि कार्यों के उद्देश्य से स्थापित की गई थी। डॉ. मोहन यादव और उनकी पत्नी वर्ष 2017 में ही कंपनी के निदेशक पद से अलग हो चुके थे तथा मार्च 2026 में अपने शेयर भी त्याग चुके हैं। ऐसे में कंपनी की गतिविधियों को मुख्यमंत्री पद से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से गलत है।

लखन पटेल ने मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव यादव द्वारा खरीदी गई भूमि के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह भूमि वर्ष 2019 से मार्च 2023 के बीच खरीदी गई थी। उस समय न तो डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री थे और न ही उज्जैन मास्टर प्लान-2035 से जुड़ी कोई ऐसी स्थिति थी जिससे किसी प्रकार का विशेष लाभ प्राप्त किया जा सके। इसलिए भूमि खरीद को वर्तमान प्रशासनिक निर्णयों से जोड़ना भ्रामक है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा खरीदी गई भूमि भी कृषि भूमि की श्रेणी में आती है तथा वह किसी विकसित व्यावसायिक क्षेत्र का हिस्सा नहीं है। ऐसे में भूमि के मूल्य में कथित वृद्धि या सरकारी लाभ प्राप्त होने के आरोपों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।

राज्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदार स्वतंत्र व्यक्ति हैं और वे अपने-अपने व्यवसाय एवं आर्थिक गतिविधियों का संचालन स्वयं करते हैं। किसी रिश्तेदार के निजी व्यापार, निवेश या लेन-देन को सीधे मुख्यमंत्री से जोड़ना न केवल अनुचित है बल्कि तथ्यों के साथ अन्याय भी है।

उज्जैन मास्टर प्लान-2035 को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए लखन पटेल ने कहा कि यह मास्टर प्लान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पदभार ग्रहण करने से पहले ही प्रभावी हो चुका था। इसलिए सड़क, हाईवे अथवा विकास परियोजनाओं में किसी प्रकार के विशेष हस्तक्षेप या प्रभाव के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। सभी विकास कार्य निर्धारित प्रक्रियाओं और नियमों के अनुसार संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संपत्तियों, आय और निवेश से संबंधित सभी जानकारियां विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान दाखिल शपथ पत्र में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। ऐसे में हितों के टकराव, पद के दुरुपयोग अथवा अनुचित लाभ प्राप्त करने के आरोपों को कोई प्रमाणिक आधार प्राप्त नहीं है।

राज्य मंत्री लखन पटेल ने कहा कि जनता को भ्रमित करने के उद्देश्य से आधे-अधूरे तथ्यों के आधार पर खबरें प्रसारित की जा रही हैं। उपलब्ध अभिलेखों और सार्वजनिक दस्तावेजों से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की अधिकांश संपत्तियां एवं कृषि भूमि मुख्यमंत्री बनने से पहले की हैं। इसलिए राजनीतिक लाभ के लिए फैलाए जा रहे भ्रम और दुष्प्रचार से जनता को सावधान रहने की आवश्यकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव