चित्रकूट में सरयू और मंदाकिनी के सीमांकन में सामने आया नदी का घटा कैचमेंट एरिया

 




चित्रकूट, 22 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सतना जिले की धर्मनगरी चित्रकूट में हाल ही में आई भयावह बाढ़ के बाद प्रशासन ने नदी और तटीय क्षेत्रों को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। पवित्र सरयू और मंदाकिनी नदी के सीमांकन के साथ ही इनके किनारे हुए निर्माण और अतिक्रमण का सर्वे शुरू कर दिया गया है। प्रारंभिक सीमांकन में ऐसे कई तथ्य सामने आए हैं, जो नदी के सिकुड़ते स्वरूप और उसके कैचमेंट एरिया में हुए बदलाव की ओर इशारा करते हैं।

दो राज्यों मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़ी सरयू नदी का सीमांकन परिक्रमा पथ स्थित ब्रह्मकुंड से उसके उद्गम स्थल से किया जा रहा है। प्रशासन की टीम ने अब तक करीब 500 मीटर क्षेत्र का सीमांकन किया है। इस दौरान 15 से अधिक अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। सीमांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ अतिक्रमण की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

राजस्व रिकॉर्ड में 50 मीटर चौड़ा नदी का पाट, मौके पर पांच मीटर

सीमांकन के दौरान सबसे चौंकाने वाली स्थिति उत्तर प्रदेश के कामदगिरि भवन के पास सामने आई। सरकारी राजस्व रिकॉर्ड और नक्शे में यहां सरयू नदी का पाट करीब 50 मीटर दर्ज है, जबकि मौके पर नदी की चौड़ाई महज करीब पांच मीटर पाई गई। नदी की गहराई भी लगभग डेढ़ से दो मीटर के बीच मिली।

प्रशासन की टीम के सामने आए इन आंकड़ों से साफ हुआ कि नदी का मूल क्षेत्र वर्तमान में काफी सिमट गया है। सीमांकन के दौरान नदी की जमीन पर होटल, लॉज और अन्य पक्के निर्माण भी पाए गए। इन स्थानों को चिह्नित कर रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है।

राजस्व टीम नदी की सीमा निर्धारित करने के साथ संबंधित स्थानों पर निशान और पिलर भी लगा रही है, ताकि भविष्य में नदी क्षेत्र की पहचान स्पष्ट रूप से हो सके। सरयू के करीब 200 मीटर हिस्से का सीमांकन अभी बाकी है। शेष क्षेत्र का सर्वे पूरा होने के बाद अतिक्रमण की संख्या बढ़ने की संभावना है। उत्तर प्रदेश की सीमा में आने वाले हिस्से में भी सीमांकन की प्रक्रिया जारी है।

मंदाकिनी के तट पर मंदिरों और निजी निर्माण का अतिक्रमण

सरयू के साथ ही मध्य प्रदेश के हिस्से में प्रवाहित पवित्र मंदाकिनी गंगा नदी का भी सरकारी राजस्व रिकॉर्ड और नक्शे के आधार पर सीमांकन किया जा रहा है। अब तक किए गए सीमांकन में करीब पांच अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। इनमें तीन मंदिरों के अलावा अन्य निजी निर्माण शामिल हैं।

मंदाकिनी के तटीय क्षेत्र में कई स्थानों पर लोगों ने अपने निजी उपयोग के लिए घाट भी बना रखे हैं। राजस्व टीम ने ऐसे निजी घाटों को भी अतिक्रमण की सूची में शामिल किया है। सीमांकन पूरा होने के बाद नदी के वास्तविक क्षेत्र और तटीय भूमि पर हुए निर्माण की स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

बाढ़ के कारणों की जांच के लिए पहले ही बनी थी समिति

चित्रकूट में आई भयावह बाढ़ के बाद कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने बाढ़ के कारणों की पड़ताल के लिए अधिकारियों की टीम गठित की थी। सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की गाइडलाइन के अनुरूप बाढ़ आने के कारणों और प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित करने के लिए एसडीएम मझगवां महिपाल सिंह के नेतृत्व में समिति बनाई गई थी।

इस समिति में नगर परिषद चित्रकूट के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नायब तहसीलदार, लोक निर्माण विभाग के एसडीओ, जल संसाधन विभाग के एसडीओ और नगर परिषद चित्रकूट के सब इंजीनियर को शामिल किया गया था। समिति का उद्देश्य बाढ़ के पीछे के कारणों, जल निकासी और नदी के आसपास की स्थिति का अध्ययन करना है।

ईटीएस मशीन से हो रहा नदी क्षेत्र का सीमांकन

मंदाकिनी गंगा और सरयू नदी के सीमांकन के लिए अपर कलेक्टर विकास सिंह ने नायब तहसीलदार कमलेश सिंह के नेतृत्व में अलग टीम गठित की है। इसमें चित्रकूट के राजस्व निरीक्षक अजय सिंह, कोठी के राजस्व निरीक्षक प्रबुद्ध शुक्ला, उचेहरा के राजस्व निरीक्षक प्रमोद पटेल तथा नयागांव और कामता के पटवारी रावेंद्र सिंह एवं वैभव द्विवेदी को शामिल किया गया है।

राजस्व टीम रोवर ईटीएस मशीन की मदद से दोनों नदियों के वास्तविक क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से सीमांकन कर रही है। सरकारी नक्शे और मौके की स्थिति का मिलान करते हुए नदी की सीमा निर्धारित की जा रही है। इसके साथ ही नदी की जमीन पर हुए निर्माण और कब्जों को भी दर्ज किया जा रहा है।

प्रशासन की इस कवायद का उद्देश्य बाढ़ के कारणों को समझने के साथ नदी के वास्तविक स्वरूप और उसके तटीय क्षेत्र को सुरक्षित करना है। सीमांकन पूरा होने के बाद सामने आने वाले आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होगा कि समय के साथ सरयू और मंदाकिनी के नदी क्षेत्र में कितनी कमी आई है तथा किन स्थानों पर नदी की भूमि पर निर्माण या अन्य तरह का अतिक्रमण हुआ है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी