जातिगत जनगणना के प्रारूप पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, कहा- सही आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय का आधार कमजोर होगा
भोपाल, 05 सितंबर (हि.स.)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप पर सवाल उठाते हुए इसे बदलने की मांग की है। शनिवार को राजधानी भाेपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि जातियों की गणना के लिए ओपन-एंडेड व्यवस्था के बजाय प्रमाणित जातियों की ड्रॉपडाउन सूची का इस्तेमाल होना चाहिए।
कांग्रेस नेता लल्लू ने कहा कि अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में एक ही जाति के अलग नाम, उपजाति और वर्तनी होने से ओपन-एंडेड प्रविष्टियों में आंकड़ों की विसंगति की आशंका है। उन्होंने एसईसीसी-2011 में बड़ी संख्या में अलग-अलग जातिगत प्रविष्टियां सामने आने का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बननी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रश्नावली में ओबीसी और ईबीसी वर्ग की वास्तविक संख्या दर्ज करने को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि सही जनसंख्या आंकड़े ही आरक्षण, शिक्षा, रोजगार, छात्रवृत्ति और कल्याणकारी योजनाओं में उचित हिस्सेदारी तय करने का आधार बन सकते हैं।
लल्लू ने केंद्र सरकार से मौजूदा प्रश्नावली में बदलाव कर प्रमाणित जाति सूची शामिल करने, तेलंगाना और बिहार की पद्धतियों का अध्ययन करने तथा राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से व्यापक परामर्श की मांग की। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। कांग्रेस ने कहा कि उसका स्पष्ट सूत्र है-“सही गिनती, सही आंकड़े, सही हिस्सेदारी और सामाजिक न्याय।” पत्रकार वार्ता में पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पवन पटेल सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे