चीनी पटाखों और उड़ने वाली लालटेन से आगजनी का खतरा, सुप्रीम कोर्ट-एनजीटी के निर्देशों के पालन की मांग
जबलपुर, 22 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेशा के जबलपुर शहर में प्रतिबंधित पटाखों और कथित फर्जी ग्रीन पटाखों की बिक्री के विरोध में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच सहित विभिन्न जनसंगठनों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इसमें अवैध पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि शहर में खतरनाक चीनी पटाखों और हवा में उड़ने वाली लालटेन का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ ही घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आगजनी की आशंका भी बढ़ रही है। जनसंगठनों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के 12 मई 2026 और सुप्रीम कोर्ट के 29 अक्टूबर 2021 के आदेशों का हवाला देते हुए संबंधित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप पटाखों की रासायनिक और ध्वनि स्तर संबंधी तकनीकी जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके साथ ही पटाखा कारोबारियों से सुरक्षा संबंधी अंडरटेकिंग लेने और बाजार में बिकने वाले उत्पादों की नियमित निगरानी करने की आवश्यकता बताई गई। मंच ने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर इन प्रक्रियाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होने से प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
जनसंगठनों ने त्योहारी सीजन में अवैध पटाखों की बिक्री रोकने के लिए विशेष उड़नदस्ते गठित करने, पटाखा दुकानों की जांच कराने और नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रतिबंधित पटाखों और उड़ने वाली लालटेन के इस्तेमाल की अनदेखी आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है।
कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। उन्होंने संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने और मामले की जांच कराने का भरोसा भी दिलाया।
हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक