अनूपपुर : नगर पालिका में भाजपा का अध्यक्ष और कांग्रेस का‘मंत्रिमंडल’, पीआईसी में फिर उलटफेर
अनूपपुर, 11 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की अनूपपुर जिला मुख्यालय की नगर पालिका भी अजूबा हैं, जहां दोनो दल सत्ता और विपक्ष मिलकर सत्ता का सुख भोग रहें हैं। यहा भाजपा का नपा अध्यक्ष हैं तो कांग्रेस मंत्रिमंडल के सहारे नगर की सत्ता आराम से चल रहीं हैं।
शुक्रवार को एक बार फिर अपनी पीआईसी में बदलाव को लेकर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र बन गया है। वार्ड क्रमांक-2 के पार्षद एवं सभापति संजय चौधरी का पीआईसी सभापति पद से दिया इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। उनके स्थान पर वार्ड 9 के भाजपा पार्षद अनिल पटेल को नया सभापति बनाया गया है। उन्हें योजना, यातायात, परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन महज सभापति बदलने की यह कार्रवाई अनूपपुर नगरपालिका के पिछले कुछ वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए कई सवाल भी खड़े कर रही है। नगर पालिका अध्यक्ष अंजुलिका शैलेंद्र सिंह के कार्यकाल में पीआईसी को लेकर विवाद और फेरबदल लगातार चर्चा में रहे हैं।
भाजपा पार्षदों के इस्तीफे से शुरू हुआ विवाद
अनूपपुर नगरपालिका में सत्ता का समीकरण दिलचस्प है। अध्यक्ष पद पर भाजपा का कब्जा है, जबकि पीआईसी में कांग्रेस पार्षदों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे परिषद की राजनीति में एक तरह का विरोधाभासी सत्ता-समीकरण देखने को मिलता है। पूर्व में भाजपा पार्षद अनिल पटेल, प्रवीण सिंह और गणेश रौतेल द्वारा पीआईसी से इस्तीफा दिए जाने और परिषद में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया था। इसके बाद अध्यक्ष द्वारा इन पार्षदों को पीआईसी से हटाकर कांग्रेस पार्षदों को स्थान दिए जाने की चर्चा ने नगर की राजनीति को और गर्म कर दिया था। जो प्रदेश की इकलौती बन गई। अब भाजपा पार्षद संजय चौधरी के इस्तीफे के बाद एक बार फिर भाजपा के ही पार्षद अनिल पटेल को पीआईसी में नई जिम्मेदारी दी गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने नगरपालिका की अंदरूनी राजनीति को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अध्यक्ष भाजपा का, ‘मंत्रिमंडल’ कांग्रेस का,सियासी समीकरण पर कटाक्ष
अनूपपुर नगरपालिका की मौजूदा स्थिति पर राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इसी बात की है कि अध्यक्ष भाजपा का है, लेकिन पीआईसी में कांग्रेस पार्षदों की मौजूदगी प्रभावशाली है। विडंबना यह भी है कि पीआईसी में जब-जब बदलाव या विवाद सामने आया, उसमें भाजपा पार्षदों के नाम प्रमुखता से सामने आए, जबकि कांग्रेस पार्षद लगातार पीआईसी में अपनी भूमिका निभाते नजर आए। यही वजह है कि शहर की राजनीतिक चर्चा में अब यह सवाल है कि नगरपालिका में सत्ता का वास्तविक संचालन किसके हाथ में है भाजपा के निर्वाचित अध्यक्ष-पदाधिकारियों के या कांग्रेस समर्थित पीआईसी के?
भाजपा की अंदरूनी खींचतान, कांग्रेस को मिला राजनीतिक स्पेस
नगरपालिका की राजनीति का यह घटनाक्रम भाजपा के लिए भी आत्ममंथन का विषय माना जा रहा है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित भाजपा के निर्वाचित पार्षदों की मौजूदगी के बावजूद पीआईसी को लेकर बार-बार विवाद सामने आना संगठनात्मक समन्वय पर सवाल खड़े करता है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के पार्षद बिना अध्यक्ष पद पर रहते हुए भी पीआईसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो भाजपा के अंदरूनी मतभेदों ने कांग्रेस को नगरपालिका की सत्ता-व्यवस्था में अपना राजनीतिक स्पेस बनाने का अवसर दिया है।
नई जिम्मेदारी, नई चुनौती
नवनियुक्त सभापति अनिल पटेल के सामने अब केवल विभाग संभालने की चुनौती नहीं है, बल्कि पीआईसी में बेहतर समन्वय कायम करने की भी बड़ी जिम्मेदारी है। योजना, यातायात, परिवहन और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण विभाग सीधे शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े हैं। अब देखना यह होगा कि अनिल पटेल नई जिम्मेदारी को कितनी मजबूती से निभा पाते हैं और क्या उनके आने के बाद पीआईसी के भीतर चल रही खींचतान पर विराम लगता है या फिर अनूपपुर नगरपालिका की राजनीति में ‘पीआईसी बदलने का खेल’ आगे भी जारी रहता है। फिलहाल जिला मुख्यालय की इस नगरीय निकाय की राजनीति में एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है,अध्यक्ष भाजपा का, पार्षद भाजपा के, लेकिन पीआईसी में कांग्रेस का प्रभाव आखिर क्यों?
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला