अनूपपुर: भाजपा सांसद का पति से 9 साल बाद आपसी की सहमति से संबंध विच्छेद, 2021 से अलग रह रहे थे
अनूपपुर, 14 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह का पति नरेंद्र सिंह मरावी के साथ संबंध विच्छेद हो गया है। अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम न्यायालय ने दोनों की आपसी सहमति से 3 सितंबर 2026 को विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की। दोनों की शादी 23 नवंबर 2017 को हिंदू रीति-रिवाज से राजेंद्रग्राम में हुई थी। शादी के करीब 9 साल बाद तलाक हुआ है।
छोटी-छोटी बातों पर विवाद, 5 साल से अलग थे कोर्ट में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार शादी के बाद दोनों राजेंद्रग्राम में साथ रहे। 20 जून 2019 को बेटी गिरिशा सिंह का जन्म हुआ। इसके बाद छोटी-छोटी बातों को लेकर दोनों के बीच विवाद होने लगे। विवाद बढ़ने पर दोनों का एक-दूसरे से मिलना-जुलना बंद हो गया और वे 5 मई 2021 से अलग रहने लगे।
हिमाद्री की ओर से कोर्ट में कहा गया कि दोनों के बीच अब साथ रहने की कोई संभावना नहीं है और वैवाहिक दाम्पत्य जीवन समाप्त हो चुका है। याचिका में दोनों ने विवाह विच्छेद के लिए सहमति जताई। दस्तावेज में एक-दूसरे पर कोई विशेष आरोप नहीं लगाया गया। इसमें कहा गया कि उनके बीच वैवाहिक संबंध सामान्य रूप से चलना संभव नहीं है।
हिमाद्री के साथ रहेगी बेटी, गुजारा नहीं मांगा
कोर्ट के सामने रखा गया कि बेटी गिरिशा सिंह हिमाद्री के साथ रह रही है। उसके पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और वैवाहिक खर्च की जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह की होगी। हिमाद्री ने अपने और बेटी के लिए नरेंद्र सिंह मरावी से भरण-पोषण या गुजारा भत्ता नहीं मांगने की बात कही। दोनों पक्षों ने कहा कि विवाह से जुड़े गिफ्ट्स और जेवरात को लेकर कोई विवाद नहीं है।
कोर्ट ने सुलह के लिए दिया छह महीने का समय
कोर्ट ने दोनों को फैसला बदलने और फिर से साथ आने के लिए छह महीने का समय दिया था। न्यायालय ने दोनों के पुनर्मिलाप की कोशिश की, लेकिन यह सफल नहीं हुआ। छह महीने की अवधि पूरी होने के बाद भी दोनों ने कोर्ट को बताया कि पति-पत्नी के रूप में साथ रहना संभव नहीं है और वे अपनी इच्छा से तलाक चाहते हैं।
कोर्ट ने माना- दाम्पत्य जीवन निभाना संभव नहीं
छह महीने की अवधि और सुलह के प्रयास विफल होने के बाद न्यायालय ने दोनों की पारस्परिक सहमति से 3 सितंबर 2026 को हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी। कोर्ट ने माना कि दोनों का पति-पत्नी के रूप में साथ रहकर दाम्पत्य जीवन निभाना संभव नहीं है।
नरेंद्र मरावी बोले- मैंने अभी आदेश नहीं देखा है
तलाक को लेकर नरेंद्र मरावी ने दैनिक भास्कर से कहा- तलाक के लिए दोनों की आपसी सहमति थी, जिस पर कोर्ट ने निर्णय कर दिया है। हालांकि, अभी मैंने आदेश देखा नहीं है। तलाक के संबंध में हिमाद्री सिंह का पक्ष जानने फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
हिमाद्री के अधिवक्ताच तीरथ प्रसाद लवमेश ने सोमवार को बताया कि 3 सितंबर को आपसी सहमति से दोनों के बीच तलाक का आदेश हुआ है।
सांसद हिमाद्री सिंह का परिचय
38 वर्षीय हिमाद्री सिंह शहडोल से 2019 और 2024 में लगातार दो लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं। पिता दलबीर सिंह 1980, 1984 और 1991 में तीन बार लोकसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। मां राजेश नंदिनी सिंह 1993 में विधानसभा और 2009 में लोकसभा का चुनाव जीत चुकी हैं। लोकसभा चुनाव-2009 में राजेश नंदिनी ने भाजपा के नरेंद्र सिंह मरावी को 13,415 वोटों से हराया था। बाद में 23 नवंबर 2017 को उन्हीं की बेटी हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का विवाह हुआ था। हिमाद्री ने 2016 में कांग्रेस के टिकट पर शहडोल लोकसभा उपचुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के ज्ञान सिंह से हार गई थीं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 20 मार्च 2019 को कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं। भाजपा में शामिल होने के कुछ ही समय बाद उन्होंने शहडोल से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीतीं। 2024 में शहडोल से लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीतकर फिर सांसद बनीं।
नरेंद्र सिंह मरावी का परिचय
सम्राट अशोक टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट विदिशा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक। राजनीतिक सफर 1997 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुआ। इसके बाद 2000 से 2003 तक मध्य भारत में एबीवीपी के प्रांत जनजाति छात्र प्रमुख रहे। 2004 से 2009 तक जिला पंचायत अनूपपुर के वार्ड क्रमांक-3 के सदस्य रहे। 2004 से 2006 2006 तक भाजपा युवा मोर्चा मध्य प्रदेश की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य रहे। 2006 से 2009 तक भाजपा युवा मोर्चा अनूपपुर के जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
नरेंद्र सिंह मरावी 2009 में शहडोल लोकसभा सीट से भाजपा के प्रत्याशी रहे। इस चुनाव में हिमाद्रि की मां राजेश नंदिनी सिंह ने 13,415 वोटों से हराया था। 2010 से 2013 तक वे भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा, मध्य प्रदेश के प्रदेश महामंत्री रहे। 2014 से 2015 तक भाजपा युवा मोर्चा मध्य प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। सितंबर 2015 से नवंबर 2018 तक एमपी राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला