एसआईआर पर कांग्रेस के आरोपों को भाजपा ने बताया भ्रामक, हेमंत खण्डेलवाल बोले- 13 करोड़ नाम हटाने का दावा तथ्यों से परे

 


भोपाल, 05 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। गुरुवार को राजधानी भाेपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी।

खण्डेलवाल ने मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए जाने के दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है। वहीं, प्रेम शुक्ला ने कांग्रेस पर चुनावी हार के लिए निर्वाचन आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया।

हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि आजादी के बाद देश में कई बार मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण हो चुका है। उनके अनुसार, 12 में से 10 बार यह प्रक्रिया कांग्रेस के शासनकाल में हुई। ऐसे में कांग्रेस को एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल में हुए पुनरीक्षणों की स्थिति भी स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को अद्यतन और पारदर्शी बनाना निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

13 करोड़ नाम हटाने के दावे पर दी सफाई

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष खण्डेलवाल ने कहा कि मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम काटे जाने का दावा पूरी प्रक्रिया को एक ही नजरिये से प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि एसआईआर के दौरान अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं के नामों का सत्यापन किया गया है। उनके अनुसार, इन श्रेणियों के आंकड़ों को नाम हटाने के आरोप के रूप में प्रस्तुत कर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों के नाम बने रहना, एक ही व्यक्ति का अलग-अलग स्थानों पर पंजीकरण और अपात्र प्रविष्टियां लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं हैं। पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखते हुए सूची को त्रुटिरहित बनाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट भी शामिल होते हैं। मतदाता सूची को लेकर आपत्ति दर्ज कराने और सुधार का अवसर भी उपलब्ध रहता है।

खण्डेलवाल ने बताया कि गुजरात और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी मतदाताओं के सत्यापन के लिए कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा है। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है।

प्रदेश के जिलों में निकाली जाएंगी पदयात्राएं

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। उनके मुताबिक, कांग्रेस और विपक्षी दल एसआईआर को लेकर सवाल उठाकर निर्वाचन आयोग की भूमिका पर संदेह पैदा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भाजपा ने इस मुद्दे पर ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू किया है।

खण्डेलवाल के अनुसार, इंदौर, जबलपुर और भोपाल में पदयात्राएं निकाली जा चुकी हैं। आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी पदयात्राओं के माध्यम से अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इन कार्यक्रमों में डॉक्टर, वकील, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने भागीदारी की है।

चुनावी हार पर आत्ममंथन करे कांग्रेस : प्रेम शुक्ला

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विमर्श और बहस के लिए संसद सबसे उपयुक्त मंच है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद में चर्चा के बजाय हंगामा करते हैं और बाद में सड़क पर बहस की चुनौती देते हैं। शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस को निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाने के बजाय अपनी चुनावी स्थिति और नीतियों पर आत्ममंथन करना चाहिए।

उन्होंने एसआईआर को लेकर कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मतदाता सूची का पुनरीक्षण गलत है तो कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसके शासनकाल में भी यह प्रक्रिया क्यों अपनाई गई थी। शुक्ला ने कहा कि मृत और दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाताओं के नामों का सत्यापन करना निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा है।

मतदाताओं के आंकड़ों का दिया विवरण

प्रेम शुक्ला ने एसआईआर के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 6.3 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर जा चुके थे, लगभग 3 करोड़ मतदाता सत्यापन के दौरान अपने पते पर नहीं मिले, करीब 2.8 करोड़ मतदाता मृत पाए गए और लगभग एक करोड़ प्रविष्टियां दोहरी थीं। उन्होंने दावा किया कि इन श्रेणियों के सत्यापन के बाद मतदाता सूची में सुधार किया गया है।

उन्होंने मध्यप्रदेश का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में करीब 2.7 लाख दोहरी और 8.46 लाख मृत मतदाताओं की प्रविष्टियां हटाई गई हैं। शुक्ला ने कहा कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

शुक्ला ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। उनके मुताबिक, कांग्रेस को अपनी राजनीतिक चुनौतियों का कारण नेतृत्व, नीतियों और जनाधार में तलाशना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपनी चुनावी विफलताओं के लिए संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहरा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे