शहडोल: भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा उपाध्यक्ष को कुछ घंटों में हटाया

 






शहडोल, 09 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में भाजपा के संगठनात्मक फेरबदल और नियुक्तियों को लेकर गुरूवार को विवाद सामने आया है। भाजपा नेता सरोज यादव को पहले पिछड़ा वर्ग मोर्चा का जिला उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, लेकिन महज कुछ ही घंटों के भीतर जारी हुई संशोधित सूची से उनका नाम गायब कर दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम से नाराज होकर सरोज यादव ने गुरुवार को संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से लिखित शिकायत की है।

राजनीतिक घटनाक्रम 5 जुलाई की रात को शुरू हुआ, जब भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा की 30 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी की आधिकारिक घोषणा की गई। इस पहली सूची में सरोज यादव का नाम तीसरे नंबर पर जिला उपाध्यक्ष के रूप में शामिल था। हालांकि, अगले ही दिन यानी 6 जुलाई की सुबह संगठन ने एक संशोधित सूची जारी की, जिसमें से सरोज यादव का नाम हटा दिया गया और पदाधिकारियों की संख्या घटकर 29 रह गई। इस अचानक किए गए बदलाव पर पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष राकेश कनौजे ने संगठन का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरोज यादव के नाम की घोषणा होते ही स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने इसका तीव्र विरोध शुरू कर दिया था। इसके अलावा, उन्हें बकहो मंडल से आवश्यक अनुशंसा (सिफारिश) भी प्राप्त नहीं हुई थी। कनौजे के अनुसार, बढ़ते विवाद को देखते हुए यह मामला प्रदेश स्तर तक पहुंचा। इसके बाद संभाग प्रभारी गौरव सिरोठिया और भाजपा जिलाध्यक्ष अमिता चपरा के निर्देश और संगठनात्मक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही संशोधित सूची जारी की गई।

दूसरी तरफ, पद से हटाए गए नेता सरोज यादव ने संगठन के दावों को खारिज करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। यादव का कहना है कि उन्होंने हाल ही में अपने वार्ड में एक रसूखदार 'ठेकेदार नेता' के कराए जा रहे घटिया निर्माण कार्य का खुलकर विरोध किया था। इसके साथ ही उन्होंने एक अन्य प्रभावशाली नेता से जुड़े बिजली पोल के मामले पर भी आपत्ति जताई थी। यादव का दावा है कि इसी रंजिश के चलते प्रभाव का इस्तेमाल कर उनका नाम सूची से कटवाया गया है।

यादव ने यह भी खुलासा किया कि जब उन्होंने इस संबंध में मोर्चा के जिलाध्यक्ष राकेश कनौजे से बात की, तो कनौजे ने माना कि उन पर ऊपर से बहुत ज्यादा दबाव था और मजबूरी में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। जबकि नियुक्ति से पहले खुद भाजपा जिलाध्यक्ष अमिता चपरा ने उन्हें फोन कर कार्यकारिणी में शामिल किए जाने की बधाई दी थी।

जिलाध्यक्ष बोलीं- शिकायत मिली है, वरिष्ठों की सहमति से हुआ फैसला इस पूरे अंतर्विरोध और हंगामे पर भाजपा जिलाध्यक्ष अमिता चपरा ने साफ किया कि उन्हें सरोज यादव की शिकायत मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि राजनीति और संगठन में स्थानीय नेताओं के विरोध को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के चलते ही वरिष्ठ पदाधिकारियों की सहमति से यह निर्णय लिया गया है। बहरहाल, इस घटनाक्रम के बाद जिले में भाजपा के भीतर की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला