भोपाल के बड़ा तालाब पर कब्जे को हटाने चला बुलडोजर, 15 दिन में 347 अतिक्रमण हटाने का अभियान, हलालपुरा से कार्रवाई शुरू
भोपाल, 10 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भाेपाल की लाइफ लाइन बड़ा तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन ने एक बार फिर सख्त अभियान शुरू कर दिया है। शुक्रवार सुबह हलालपुरा क्षेत्र से कार्रवाई की शुरुआत हुई, जहां बैरागढ़ तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह के नेतृत्व में टीम ने जेसीबी की मदद से अवैध निर्माणों को हटाना शुरू किया।
कार्रवाई के दौरान तालाब किनारे बने एक फार्म हाउस और उसकी बाउंड्री वॉल को तोड़ा गया। मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। स्थानीय लोगों की भीड़ जुटी, लेकिन प्रशासन ने सख्ती के साथ अभियान जारी रखा।
15 दिन में 347 अतिक्रमण हटाने का लक्ष्य
प्रशासन के अनुसार, बड़ा तालाब के आसपास कुल 347 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें अगले 15 दिनों में हटाया जाएगा। यह कार्रवाई भोज वेटलैंड रूल्स 2022 के तहत की जा रही है। स्पष्ट किया गया है कि 16 मार्च 2022 के बाद बने सभी निर्माण अवैध माने जाएंगे। साथ ही तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से 50 मीटर तक के क्षेत्र में बने निर्माणों पर सीधी कार्रवाई होगी। इस अभियान के तहत चार दिन पहले भदभदा क्षेत्र में भी अतिक्रमण हटाए गए थे। अब हलालपुरा से शुरू हुआ अभियान चरणबद्ध तरीके से शहर के अन्य इलाकों में आगे बढ़ेगा।
इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा अतिक्रमण
जांच में सामने आया है कि टीटी नगर एसडीएम सर्कल के गौरा गांव और बिसनखेड़ी में सबसे अधिक कब्जे हैं। इसके अलावा बैरागढ़ और बहेटा क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर तालाब की सीमा में निर्माण किए गए हैं। वहीं वन विहार नेशनल पार्क क्षेत्र में सीमांकन के दौरान करीब 2.5 किमी में 100 से ज्यादा पिलर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसे विशेषज्ञ वेटलैंड नियमों के खिलाफ मान रहे हैं।
तय शेड्यूल के अनुसार चलेगी कार्रवाई
10 अप्रैल: हलालपुरा – चिन्हित कब्जे
11 अप्रैल: बैरागढ़ – काशियाना बंगले के पीछे
12-13 अप्रैल: सेवनिया गोंड – सरकारी व निजी जमीन
15-16 अप्रैल: बैरागढ़ – मकान व मैरिज गार्डन
17 अप्रैल: हुजूर तहसील – सरकारी भूमि
18-19 अप्रैल: टीटी नगर – शेष अतिक्रमण
20 अप्रैल: बैरागढ़ – बचा हुआ हिस्सा
21 अप्रैल: हुजूर तहसील – अंतिम चरण
दो महीने चला सर्वे, अब सख्त कार्रवाई
पिछले दो महीनों से जिला प्रशासन द्वारा लगातार सर्वे कर अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे। अब सूची के आधार पर एक-एक कर कार्रवाई की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।
एनजीटी तक पहुंच सकता है मामला
पर्यावरणविदों ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला उठाने की बात कही है। उनका मानना है कि बड़ा तालाब की पारिस्थितिकी को बचाने के लिए सख्त और निरंतर कार्रवाई जरूरी है। बड़ा तालाब न सिर्फ भोपाल की पहचान है, बल्कि शहर के जल स्रोत और पर्यावरण संतुलन का प्रमुख आधार भी है। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान से तालाब की जलधारण क्षमता और पारिस्थितिकी संरक्षण में सुधार होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे