भोपाल के शहरी संकट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने लिखा पत्र
भोपाल, 13 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरूवार काे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के बाद की जा रही कार्रवाई और करीब 1,800 नोटिस जारी होने की जानकारी से हजारों परिवारों की आजीविका और छोटे कारोबार प्रभावित हो रहे हैं। पटवारी ने सरकार से कार्रवाई के साथ-साथ दीर्घकालिक शहरी नियोजन पर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है।
जीतू पटवारी के मुताबिक, वर्षों से जिन क्षेत्रों में दुकान, कार्यालय, क्लिनिक, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती रही हैं, वहां नागरिकों ने कई मामलों में कर, लाइसेंस अथवा अन्य सरकारी व्यवस्थाओं के तहत कारोबार किया है। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी केवल व्यापारियों या रहवासियों पर डालना उचित नहीं होगा। उन्होंने सरकार और नगर नियोजन संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ऐसी गतिविधियां लंबे समय तक चलती रहीं तो उनके नियमन और नियोजन की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसियों की है।
करीब दो दशक पुराने मास्टर प्लान पर सवाल
पीसीसी चीफ पटवारी ने कहा कि वर्ष 1975 के बाद भोपाल के लिए 1991 और 2005 में दो डेवलपमेंट प्लान स्वीकृत हुए। वर्ष 2005 का प्लान अब भी प्रभावी है। उन्होंने कहा कि भोपाल विकास योजना-2031 का ड्राफ्ट सरकार ने फरवरी 2024 में वापस किया था और दिसंबर 2025 तक संशोधित ड्राफ्ट प्रस्तुत नहीं किया गया। उनका कहना है कि शहर की आबादी, यातायात, आवास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यावसायिक गतिविधियों में पिछले दो दशकों में व्यापक बदलाव आया है। ऐसे में पुराने भू-उपयोग मानचित्र के आधार पर मौजूदा शहर का नियमन करना व्यावहारिक नहीं है। पटवारी ने कहा कि लंबे समय से सत्ता में रही सरकार के कार्यकाल में राजधानी का अद्यतन और लागू मास्टर प्लान नहीं होना शहरी नियोजन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी भी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाना चाहिए, लेकिन न्यायालय के आदेश का पालन और शहर की नियोजन संबंधी समस्याओं का समाधान अलग-अलग विषय हैं। उनके अनुसार, सरकार को कार्रवाई के साथ प्रभावित नागरिकों और कारोबारियों के लिए व्यावहारिक विकल्प भी तैयार करने चाहिए।
पटवारी ने मुख्यमंत्री के सामने 10 सुझाव रखे हैं-
1. भोपाल विकास योजना-2031 जल्द सार्वजनिक की जाए। फरवरी 2024 में वापस किए गए ड्राफ्ट के बाद हुई कार्रवाई और संशोधित योजना लागू करने की समयसीमा स्पष्ट की जाए।
2. जीआईएस आधारित ‘Existing Use’ सर्वे कराया जाए। शहर में वर्तमान भू-उपयोग की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन कर आवासीय, व्यावसायिक, मिश्रित और अन्य श्रेणियां निर्धारित की जाएं।
3. लंबे समय से संचालित कारोबारों के लिए नीति बने। जहां लोगों ने सरकारी अनुमति, लाइसेंस अथवा कर व्यवस्था के आधार पर निवेश किया है, वहां कानून के दायरे में नियमितीकरण, पुनर्वर्गीकरण या वैकल्पिक स्थान की संभावनाएं तलाशने की बात उन्होंने कही है।
4. मिश्रित भू-उपयोग की स्पष्ट नीति बनाई जाए। मुख्य मार्गों और निर्धारित क्षेत्रों में यातायात, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा व पर्यावरणीय मानकों के आधार पर मिश्रित उपयोग की अनुमति पर विचार किया जाए।
5. छोटे कारोबारियों के लिए वैकल्पिक व्यावसायिक क्षेत्र विकसित किए जाएं। कार्रवाई वाले क्षेत्रों के आसपास किफायती व्यावसायिक स्थान उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो।
6. रहवासियों के हितों की भी सुरक्षा हो। यातायात, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी वास्तविक समस्याओं वाले क्षेत्रों में नियमन किया जाए, लेकिन सभी गतिविधियों पर एक समान कार्रवाई के बजाय उनके प्रभाव के आधार पर वर्गीकरण हो।
7. एकीकृत शहरी नियोजन व्यवस्था पर विचार हो। नगर निगम, नगर तथा ग्राम निवेश, बीडीए, यातायात सहित संबंधित विभागों के बीच समन्वय के लिए एकीकृत डिजिटल प्लानिंग सिस्टम विकसित किया जाए।
8. नागरिकों और व्यापारियों की सार्वजनिक सुनवाई हो। प्रभावित क्षेत्रों में जनसुनवाई कर समस्याओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
9. मास्टर प्लान की नियमित समीक्षा हो। विकास योजनाओं की हर पांच वर्ष में समीक्षा और आवश्यक संशोधन की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया है।
10. श्वेत-पत्र जारी किया जाए। वर्ष 2005 के मास्टर प्लान से लेकर 2031 के प्रस्तावित प्लान तक की प्रक्रिया, देरी और फरवरी 2024 में ड्राफ्ट लौटाए जाने के कारणों सहित अब तक की कार्रवाई सार्वजनिक की जाए।
‘नोटिस और सीलिंग नहीं, स्पष्ट नीति चाहिए’
जीतू पटवारी ने कहा कि भोपाल को “सीलिंग बनाम व्यापार” अथवा “रहवासी बनाम व्यापारी” के संघर्ष में धकेलना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उनके अनुसार, सरकार को अपनी नियोजन संबंधी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें सुरक्षित आवास, व्यवस्थित बाजार और भविष्य की शहरी जरूरतों के अनुरूप बुनियादी ढांचा साथ-साथ विकसित हो।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लंबे समय से चली आ रही नियोजन संबंधी समस्याओं का पूरा आर्थिक और सामाजिक बोझ आम नागरिकों पर न पड़े। पटवारी ने कहा कि भोपाल को केवल नोटिस और सीलिंग नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति और नया मास्टर प्लान चाहिए।
दूसरे शहरों के लिए भी समय रहते नीति बनाने की मांग
पटवारी ने कहा कि भोपाल के बाद इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में भी भविष्य में इसी तरह की समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए सरकार को पूरे मध्यप्रदेश के शहरों के लिए समय रहते व्यापक शहरी नियोजन और भूमि उपयोग नीति तैयार करनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में समयबद्ध कार्ययोजना घोषित करने तथा नागरिकों, व्यापारियों और रहवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित एवं कानूनी समाधान सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे