भोपाल में शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना आज से, टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने समेत कई मांग, 2 अक्टूबर को उपवास
भोपाल, 27 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगों को लेकर अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा रविवार से राजधानी के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेगा। प्रदेशभर के अलग-अलग संभागों से शिक्षक इसमें शामिल होंगे। मोर्चे ने तीनों मांगों के ठोस निराकरण तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांगों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त करना, प्रथम नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि एवं वरिष्ठता की गणना और ई-अटेंडेंस व्यवस्था को स्वैच्छिक करना शामिल है। मोर्चे का कहना है कि इन मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के स्तर पर कई बार चर्चा और ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक ठोस निर्णय नहीं हुआ है।
टीईटी से पुराने शिक्षकों को मुक्त करने की मांग
मोर्चा संयोजक एवं राज्य शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव के मुताबिक, लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुुक्त किया जाना चाहिए। संगठन ने इस संबंध में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करने और केंद्र सरकार को भेजने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता को लेकर वे पहले भी विरोध दर्ज करा चुके हैं।
पहली नियुक्ति से सेवा गणना पर जोर
शिक्षकों की दूसरी मांग प्रथम नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि और वरिष्ठता की गणना करने की है। मोर्चे के अनुसार, इससे शिक्षकों को उनकी वास्तविक सेवा अवधि के आधार पर ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण, पेंशन सहित अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का लाभ मिल सकेगा।
ई-अटेंडेंस को स्वैच्छिक करने की मांग
मोर्चे ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था को स्वैच्छिक करने की मांग भी रखी है। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों को अध्यापन के साथ विभागीय और अन्य शासकीय दायित्व भी निभाने पड़ते हैं। ऐसे में मौजूदा ई-अटेंडेंस व्यवस्था में उन्हें व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
2 अक्टूबर को विशेष उपवास
मोर्चे ने धरने को चरणबद्ध तरीके से चलाने की रूपरेखा बनाई है। रविवार से विभिन्न संभागों के शिक्षक धरने में शामिल होंगे। 2 अक्टूबर को विशेष उपवास कार्यक्रम रखा गया है, जबकि 3 अक्टूबर तक अलग-अलग संभागों से शिक्षकों की भागीदारी का कार्यक्रम प्रस्तावित है। मोर्चे ने मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कर तीनों मांगों पर सीधे चर्चा की मांग भी की है।
जगदीश यादव ने कहा कि ज्ञापन, बैठकों और संवाद के माध्यम से मांगों के निराकरण का प्रयास किया गया, लेकिन ठोस निर्णय नहीं होने पर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। मोर्चे के अन्य पदाधिकारियों राकेश दुबे, मनोहर दुबे, परमानंद डेहरिया, राकेश नायक, डीके सिंगौर और राकेश पटेल सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि आंदोलन की तैयारियों में जुटे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे