भोपाल में आज रात 12 बजे से टैक्सियों का चक्का जाम
- सरकारी स्तर पर किराया तय करने और एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी रोकने की मांग
भोपाल, 17 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भाेपाल में आज यानि सोमवार रात 12 बजे से टैक्सी सेवाएं बंद हो जाएंगी। भोपाल टैक्सी चालक संघ और टैक्सी यूनियन कल्याण समिति के संयुक्त मोर्चे ने 18 अगस्त से हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। मोर्चे के मुताबिक भोपाल में करीब 3,500 टैक्सियां संचालित होती हैं। हड़ताल के चलते मंगलवार से शहर में टैक्सी सेवा प्रभावित होने की संभावना है।
संयुक्त मोर्चे का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी, लगातार बढ़ते परिचालन खर्च और उनकी मांगों पर प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं होने के कारण टैक्सी चालक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। अपनी मांगों के समर्थन में मोर्चा 19 अगस्त को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर धरना-प्रदर्शन करेगा। इसके बाद मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठन ने आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की बात कही है।
सरकार तय करे टैक्सी का किराया
भोपाल टैक्सी चालक संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग टैक्सी का किराया सरकारी स्तर पर तय करने की है। उनका कहना है कि मौजूदा किराए में ईंधन, वाहन का रखरखाव, बीमा, लोन की किस्त और परिवार का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। नागले के मुताबिक केवल किराए में 20 या 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि किराया तय करने की पूरी व्यवस्था में बदलाव जरूरी है।
बेस फेयर और टाइम चार्ज भी मिले
टैक्सी चालक संघ का कहना है कि वर्ष 2014 में एग्रीगेटर कंपनियों की व्यवस्था में बेस फेयर, टाइम चार्ज और प्रति किलोमीटर किराया शामिल था। अब अधिकांश मामलों में भुगतान मुख्य रूप से तय दूरी के आधार पर किया जा रहा है। चालकों के मुताबिक इससे ट्रैफिक, प्रतीक्षा समय और वाहन संचालन की वास्तविक लागत की भरपाई नहीं हो पाती। संघ ने मांग की है कि ड्राइवरों के खर्च को ध्यान में रखते हुए बेस फेयर, टाइम चार्ज और प्रति किलोमीटर किराए की व्यवस्था फिर लागू की जाए।
निजी नंबर वाले वाहनों पर रोक की मांग
टैक्सी चालक संघ ने नॉन-कमर्शियल यानी निजी नंबर वाले कार और बाइक के साथ ई-रिक्शा के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि ऐसे वाहनों के संचालन से वैध रूप से टैक्सी परमिट और अन्य जरूरी खर्च वहन करने वाले चालकों को नुकसान हो रहा है।
मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन बंद
संयुक्त मोर्चे ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों ने उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन बंद में बदला जा सकता है। मोर्चे का कहना है कि उचित किराया तय होने और एग्रीगेटर कंपनियों की कथित मनमानी पर रोक लगने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे