भोपाल में पटवारी संघ ने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल से की मुलाकात, बर्खास्तगी-निलंबन वापस लेने की मांग पर अड़े
भोपाल, 09 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई के बावजूद पटवारियों का आंदोलन जारी है। शुक्रवार सुबह पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने राजधानी भाेपाल में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं।
संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक, उप मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को उचित मानते हुए सुधार के लिए मुख्य सचिव (सीएस) को नोटशीट भेजी है। इस पर चर्चा चल रही है। हालांकि, पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई वापस लिए जाने के बाद ही पटवारी काम पर लौटेंगे।
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ हुई बैठक में प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी, मप्र पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक के बाद दोनों संघों के अध्यक्षों ने बयान जारी कर कहा कि पटवारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं और पूरी मजबूती से संघर्ष जारी रखेंगे। संघ पदाधिकारियों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने उप मुख्यमंत्री को पटवारियों की समस्याओं और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई से अवगत कराया। चर्चा के बाद संबंधित विषय पर मुख्य सचिव को नोटशीट भेजी गई है। अब इस मामले में आगे होने वाले निर्णय पर पटवारियों की नजर है।
कार्रवाई वापस होने तक काम पर नहीं लौटेंगे पटवारी
पटवारी संघ ने बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई वापस लेने की मांग दोहराई है। पदाधिकारियों ने कहा कि मांगों का निराकरण होने तक उनका रुख स्पष्ट है। उन्होंने प्रदेशभर के पटवारियों से धैर्य बनाए रखने, किसी तरह की घबराहट से बचने और एकजुट होकर अपनी मांगों पर डटे रहने की अपील की है। संघ का कहना है कि वह अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाला नहीं है। अब आंदोलन को लेकर सरकार की ओर से होने वाली अगली पहल और मुख्य सचिव स्तर पर चल रही चर्चा के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे।
स्वामित्व योजना में 50 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य अधूरा
पटवारियों के आंदोलन के बीच स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 50 लाख हितग्राहियों को आबादी भूमि की रजिस्ट्री उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी चर्चा में है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत आबादी भूमि पर काबिज पात्र हितग्राहियों को मुफ्त रजिस्ट्री देने की योजना बनाई गई थी।
योजना के तहत एक महीने में 50 लाख रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्धारित अवधि पूरी होने में आठ दिन शेष रहने के बावजूद अब तक एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। ऐसे में लक्ष्य को पूरा करना चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। पटवारियों के आंदोलन और रजिस्ट्री प्रक्रिया की मौजूदा स्थिति के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे