भोपाल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नीट यूजी परीक्षा शांतिपूर्ण संपन्न
भोपाल, 21 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी 2026) शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। शहर में बनाए गए 32 परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की सघन जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन और कड़ी निगरानी के बीच परीक्षा कराई गई।
मध्य प्रदेश में 283 परीक्षा केंद्र बनाए गाए थे, जहां एक लाख 18 हजार परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे के बीच हुई। भोपाल में 32 परीक्षा केन्द्रों पर 13 हजार 774 परीक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल, ब्लूटूथ, स्मार्ट वॉच, ईयरफोन, कैमरा, बेल्ट, आभूषण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित था।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की गाइड लाइन के अनुसार, परीक्षा केन्द्रों पर अभ्यर्थियों को मेटल डिटेक्टर जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन और दस्तावेज जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया। कई छात्राओं को नथ, टॉप्स और अन्य आभूषण उतारने पड़े, जबकि छात्रों के कलावे और धातु वाली वस्तुएं भी बाहर रखवाई गईं। दोपहर डेढ़ बजे परीक्षा केंद्रों के गेट पूरी तरह बंद कर दिए गए। भोपाल के सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय और पीएमश्री स्कूल समेत कई केंद्रों पर कुछ छात्र महज 30 से 40 सेकंड की देरी से पहुंचे, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। छात्र गेट के बाहर खड़े होकर अधिकारियों से लगातार मिन्नतें करते रहे, पर नियम आड़े आ गए।
परीक्षा खत्म होने के बाद बाहर निकले विद्यार्थियों ने प्रश्नपत्र को पिछली परीक्षा की तुलना में अधिक कठिन बताया। अधिकांश छात्रों ने कहा कि फिजिक्स और केमिस्ट्री ने सबसे ज्यादा चुनौती दी। भोपाल के छात्र इब्राहिम अली ने बताया कि इस बार का नीट पेपर पिछली परीक्षा की तुलना में थोड़ा कठिन था। उनके मुताबिक फिजिक्स सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण रही, जबकि केमिस्ट्री का स्तर भी अपेक्षाकृत कठिन था। वहीं बायोलॉजी का पेपर आसान रहा और अधिकांश सवाल पाठ्यक्रम आधारित थे।
छात्रा सलोनी श्रीवास्तव ने कहा कि इस बार का पेपर पिछले प्रयास से काफी कठिन था। उनके अनुसार फिजिक्स के सवालों ने सबसे ज्यादा समय लिया और कई प्रश्न उलझाने वाले थे। सलोनी ने कहा कि पिछली परीक्षा में उनके ज्यादा अंक आने की संभावना थी, लेकिन इस बार अंक कम रहने की आशंका है। हालांकि उनका मानना है कि प्रश्नपत्र कठिन होने के कारण कटऑफ भी नीचे जा सकती है।
कई विद्यार्थियों ने माना कि तीन मई को परीक्षा देने के बाद उसके निरस्त होने से उनका मनोबल प्रभावित हुआ था। दोबारा उसी स्तर की तैयारी करना आसान नहीं था। छात्रों ने कहा कि दोबारा परीक्षा की तैयारी के दौरान मानसिक दबाव और अनिश्चितता बनी रही। सलोनी ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सख्त दिखाई दी। अभ्यर्थियों की कई चरणों में जांच की गई और नियमों का कड़ाई से पालन कराया गया।
रायसेन के अभिषेक साहू ने परीक्षा को लेकर अलग राय रखी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष का पेपर काफी आसान था, जबकि इस बार प्रश्नपत्र का स्तर प्रतियोगी परीक्षा के अनुरूप था। उनके मुताबिक फिजिक्स और केमिस्ट्री का स्तर अच्छा रहा, जबकि बायोलॉजी अपेक्षाकृत सरल थी। अभिषेक ने कहा कि बहुत आसान पेपर होने पर कटऑफ असामान्य रूप से बढ़ जाती है। इस बार प्रश्नपत्र संतुलित रहा है, इसलिए वास्तविक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। उन्होंने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से तैयारी कर रहे हैं और उन्हें 500 से अधिक अंक मिलने की उम्मीद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर