भोपाल: वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर मुस्लिम संगठन का प्रदर्शन, फैसला वापस लेने की मांग

 


भोपाल, 06 जुलाई (हि.स.) । मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों को शामिल किए जाने के खिलाफ सोमवार को राजधानी भोपाल के बुधवारा चौराहे पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की।

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव के पोस्टर और बैनर लेकर बुधवारा चौराहे पर जमा हुए। प्रदर्शनकारियों ने वक्फ बोर्ड में तानाशाही और मनमानी नहीं चलेगी के नारे लगाते हुए इस फैसले को मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ बताया।

शमशुल हसन ने ऐतिहासिक व धार्मिक संस्थाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह मुस्लिम समाज ने कभी अयोध्या के राम मंदिर, सोमनाथ या मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि जैसी हिंदू धार्मिक संस्थाओं और कमेटियों के प्रबंधन में हिस्सेदारी या प्रतिनिधित्व की मांग नहीं की, ठीक उसी तरह वक्फ बोर्ड जैसी पूरी तरह से मुस्लिम धार्मिक व सामाजिक संस्था में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए वक्फ कानून-2026 के लागू होते ही सरकार ने बेहद जल्दबाजी में इस बोर्ड का गठन किया है। उनका तर्क था कि यदि बोर्ड में नए सदस्यों को लाना ही था, तो मुस्लिम समाज के ही योग्य सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, डॉक्टरों या इंजीनियरों को शामिल किया जाना चाहिए था, न कि बाहरी लोगों को। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस आदेश को वापस नहीं लेती, तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।

दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश सरकार ने इस ऐतिहासिक कदम का पूरी मजबूती से बचाव किया है। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मीडिया से चर्चा करते हुए स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश नए वक्फ कानून-2026 को पूरी तरह लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है, जो कि अत्यंत गौरव की बात है।

विरोध प्रदर्शनों पर पलटवार करते हुए मंत्री सारंग ने कहा कि वक्फ बोर्ड को महज किसी मस्जिद की प्रबंधन समिति के रूप में देखना बेहद संकीर्ण सोच है। वक्फ बोर्ड का दायरा और उसकी प्रशासनिक जिम्मेदारियां कहीं अधिक व्यापक हैं, इसलिए इस पूरे विषय को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष और प्रदर्शनकारियों को घेरते हुए कहा कि यह कानून देश की लोकसभा और राज्यसभा में लंबी व व्यापक चर्चा के बाद लोकतांत्रिक तरीके से पारित हुआ है और अब देश के संविधान का हिस्सा है। ऐसे में जो लोग खुद को संविधान का रक्षक बताते हैं, वही आज संविधान के तहत बने कानून का विरोध कर खोखली राजनीति कर रहे हैं।

वक्फ बोर्ड के इस नए स्वरूप का हिंदूवादी संगठनों ने खुलकर समर्थन और स्वागत किया है। श्री हिंदू उत्सव समिति एवं संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने सरकार के इस फैसले को ऐतिहासिक और निष्पक्षता की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों के शामिल होने से अब तक बंद कमरों में होने वाली बोर्ड की कार्यप्रणाली में पूरी पारदर्शिता आएगी। इसके साथ ही वक्फ संपत्तियों के रखरखाव, दावों और प्रबंधन से जुड़ी तमाम गतिविधियों पर अब सभी वर्गों की सीधी निगरानी रहेगी, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और बोर्ड की जवाबदेही जनता के प्रति और अधिक मजबूत होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत