भोपाल में 55 मकान और 70 दुकानें टूटी, 300 से ज्यादा लोग बेघर, पुनर्वास की मांग तेज

 


भोपाल, 09 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भाेपाल के इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी में मकान और दुकानों की तोड़फोड़ के बाद प्रभावित परिवारों ने मंगलवार को नगर निगम कार्यालय में धरना-प्रदर्शन किया। रहवासियों का आरोप है कि वे पिछले लगभग 40 वर्षों से इंद्रपुरी लेबर काॅलाेनी में रह रहे थे और उनके पास सरकारी पट्टे भी हैं।

प्रभावित लोगों के अनुसार प्रशासन ने पहले आश्वासन दिया था कि हटाने से पहले वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अचानक हुई कार्रवाई में 55 मकान और 70 दुकानें तोड़ दी गईं, जिससे 300 से अधिक लोग बेघर हो गए। धरना-प्रदर्शन के बाद पीड़ितों ने महापौर और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल पुनर्वास की मांग की। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं और उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

“तीन दिन से चूल्हा नहीं जला”

पीड़ित सरोज मेहरा ने बताया कि घर और दुकान दोनों टूट जाने से उनकी आजीविका पूरी तरह प्रभावित हो गई है। उन्होंने कहा, “दुकान की कमाई से ही घर चलता था। अब तीन दिन से चूल्हा नहीं जला है। बच्चों के लिए खाने तक की व्यवस्था नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पहले आश्वासन दिया गया था कि दुकान के बदले दुकान और घर के बदले घर दिया जाएगा, लेकिन बिना पुनर्वास के कार्रवाई कर दी गई।

“पति बीमार हैं, रहने की जगह नहीं बची”

ज्योति यादव ने बताया कि उनके मायके और ससुराल दोनों जगहों के घर टूट गए हैं। उन्होंने कहा, “मेरे पति बीमार हैं और छोटी बेटी की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है। पहले कहा गया था कि नया घर मिलने के बाद ही पुराना तोड़ा जाएगा, लेकिन अब हमारे पास रहने की कोई जगह नहीं बची है।”

“सारा सामान मलबे में दब गया”

केशव गौर ने बताया कि तोड़फोड़ के दौरान सामान निकालने का समय नहीं मिला। उन्होंने कहा, “गहने, राशन और घर का सारा सामान मलबे में दब गया। अब सिर्फ वही कपड़े बचे हैं जो पहने हैं। मैं दूसरों के घरों में काम करके परिवार चलाती हूं, लेकिन किसी ने नहीं सुना।” प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब तक ठोस पुनर्वास नहीं होता, वे आंदोलन जारी रखेंगे।

प्रमुख मांगें

बेघर परिवारों को तत्काल आवास उपलब्ध कराया जाए

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट प्राथमिकता से दिए जाएं

प्रभावित दुकानदारों को वैकल्पिक दुकानें आवंटित हों

उचित मुआवजा दिया जाए

पानी, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं

पुनर्वास तक अस्थायी आवास की व्यवस्था हो

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे