भोपाल में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना, एसडीएम ऑफिस के बाहर डाला डेरा

 


भोपाल, 04 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर नजर आने लगा है। साेमवार सुबह से एमपी नगर स्थित एसडीएम कार्यालय के बाहर दर्जनों किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी, स्लॉट बुकिंग की अव्यवस्था, राजस्व मामलों में देरी और जमीन अधिग्रहण जैसे मुद्दों को लेकर किसान लामबंद हुए हैं।

एमपी नगर और हुजूर तहसील के किसान इस आंदोलन में शामिल हैं। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत और आवेदन देने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, जिससे उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। किसान कुबैर सिंह राजपूत ने बताया कि तहसील से जुड़े कई मामलों में किसानों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुकिंग, किसान सम्मान निधि, फार्मर आईडी, सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा, फसल बीमा और बिजली से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं। उनका आरोप है कि राजस्व प्रकरणों में देरी और ‘बाबूवाद’ के चलते किसानों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा। किसानों का कहना है कि सरकारी खरीदी केंद्रों पर पोर्टल की खराबी और स्लॉट बुकिंग न होने के कारण गेहूं की खरीदी समय पर नहीं हो पा रही। नतीजतन, फसल खेतों और घरों में पड़ी है, जिससे खराब मौसम में नुकसान का खतरा बढ़ गया है।

जमीन अधिग्रहण पर भी विरोध तेज

पिपलानी बी-सेक्टर से खजूरीकलां बायपास तक प्रस्तावित 4-लेन सड़क निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण का भी किसान विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा दिया जाए, जिसमें जमीन की भविष्य की कीमत और क्षेत्र के विकास को भी ध्यान में रखा जाए।

ओलावृष्टि-बेमौसम बारिश से बढ़ी चिंता

कटाई के समय हो रही बारिश और ओलावृष्टि से फसल खराब होने की आशंका भी किसानों को सता रही है। उन्होंने फसल बीमा योजना के तहत जल्द सर्वे कर पारदर्शी तरीके से मुआवजा देने की मांग की है।

पटवारियों की गांव में मौजूदगी की मांग

किसानों ने यह भी मांग उठाई है कि पटवारी सप्ताह में कम से कम दो दिन सोमवार और गुरुवार गांवों में ही बैठें, ताकि किसानों को छोटे-छोटे कामों के लिए तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। किसानों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा। यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, जिससे प्रशासन की चुनौती बढ़ सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे