भोपाल: कोविड में सेवा देने वाले आयुष डॉक्टरों ने प्रतीकात्मक रूप से जलाईं डिग्रियां, संविदा नियुक्ति और दोबारा रोजगार देने की मांग
भोपाल, 13 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भाेपाल में कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में जिम्मेदारी निभाने वाले अस्थायी आयुष डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों ने दोबारा रोजगार देने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। पिछले आठ दिनों से धरने पर बैठे कोविड योद्धाओं ने मंगलवार को प्रतीकात्मक रूप से अपनी डिग्रियां जलाकर विरोध जताया। इस दौरान नारेबाजी की गई और हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उनकी नियुक्ति की थी। उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में काम किया, लेकिन महामारी का प्रकोप कम होने के बाद बजट का हवाला देकर उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। अब वे स्वास्थ्य विभाग में खाली पदों पर संविदा नियुक्ति और दोबारा रोजगार देने की मांग कर रहे हैं।
कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल पटेल ने कहा कि कोरोना काल में कर्मचारियों ने कठिन परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय उन्हें कोविड योद्धा कहा गया, लेकिन बाद में बजट का हवाला देकर नौकरी से बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा, अब हमारी डिग्रियां किसी काम की नहीं रह गई हैं। जब नौकरी ही नहीं मिल रही तो डिग्रियां रखकर क्या करेंगे? डॉ. पटेल ने दावा किया कि कर्मचारी आठ दिन से धरने पर बैठे हैं, लेकिन अब तक शासन का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं पहुंचा है।
कोरोना काल में करीब चार हजार कर्मचारियों की हुई थी नियुक्ति
डॉ. पटेल के मुताबिक, कोरोना महामारी के दौरान प्रदेश में करीब चार हजार आयुष डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों को अस्थायी तौर पर नियुक्त किया गया था। इनमें लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, साइंटिस्ट सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे। उनका दावा है कि इनमें से करीब दो हजार से ढाई हजार कर्मचारी अब भी रोजगार की तलाश में हैं, जबकि बाकी लोग पिछले तीन वर्षों में दूसरे कार्यों से जुड़ गए हैं। संगठन का कहना है कि नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों के भविष्य को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है।
मेरिट के आधार पर हुई थीं नियुक्तियां
संघ के अनुसार, कोरोना काल में अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत अस्थायी नियुक्तियां की गई थीं। इसके लिए 23 मार्च 2020 को आदेश जारी किया गया था। इसके बाद जिला स्वास्थ्य समितियों ने मेरिट के आधार पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कर्मचारियों की नियुक्ति की थी।
खाली पदों पर संविदा नियुक्ति की मांग
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों पर कोरोना काल में सेवाएं दे चुके कर्मचारियों को संविदा के आधार पर नियुक्त किया जाए। उनका कहना है कि इससे उनके अनुभव का उपयोग होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है। डॉ. पटेल ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इन राज्यों में कोरोना काल में काम करने वाले कर्मचारियों को दोबारा रोजगार दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे राज्यों में ऐसे कर्मचारियों को फिर से काम मिल सकता है, तो मध्यप्रदेश में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है?
गांवों में भेजिए, स्वास्थ्य सेवाओं में देंगे योगदान
डॉ. पटेल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के कई पद खाली हैं और कोरोना काल में काम कर चुके कर्मचारियों के अनुभव का लाभ लिया जा सकता है। उन्होंने कहा, सरकार कहती है कि डॉक्टर नहीं हैं, हम डॉक्टर हैं। हमें गांवों में भेजिए। संघ ने अपने ज्ञापन में केंद्रीय गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पत्रों का भी उल्लेख किया है। संगठन के मुताबिक, इन पत्रों में मामले को राज्य सरकार से संबंधित बताया गया है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने सरकार से जल्द निर्णय लेकर उन्हें दोबारा रोजगार देने और स्वास्थ्य विभाग के रिक्त पदों पर संविदा नियुक्ति करने की मांग की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे