भोपाल में कोचिंग संचालकों को सख्त चेतावनी, फायर सेफ्टी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, खामी मिली तो होगी कार्रवाई
लखनऊ हादसे के बाद नगर निगम सख्त, अब तक 8 कोचिंग सील, 15 से 30 दिन में फायर सेफ्टी मानकों का पालन अनिवार्य
भोपाल, 07 जुलाई (हि.स.)। लखनऊ में हुए कोचिंग हादसे के बाद भोपाल नगर निगम ने फायर सेफ्टी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को निगम मुख्यालय में कोचिंग संचालकों और हाईराइज बिल्डिंग मालिकों की बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करने वाली कोचिंग संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई होगी।
नगर निगम अब तक फायर सेफ्टी मानकों का उल्लंघन करने पर 8 कोचिंग संस्थानों को सील कर चुका है। वहीं, अन्य संस्थानों को 15 से 30 दिन के भीतर सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ और उपायुक्त भुवन गुप्ता की मौजूदगी में हुई बैठक में अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी कोचिंग संस्थान में फायर एग्जिट, अग्निशमन उपकरण या अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं में कमी पाई गई तो उसे किसी भी कीमत पर संचालित नहीं होने दिया जाएगा।
अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि बच्चों की जिंदगी सबसे अहम है। फायर सेफ्टी में किसी तरह का समझौता नहीं होगा। अभी संस्थानों को कमियां सुधारने का एक अवसर दिया जा रहा है। यदि तय समय में व्यवस्थाएं पूरी नहीं हुईं तो कोचिंग बंद कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि कई कोचिंग संस्थान ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं जहां फायर एग्जिट तक नहीं है। ऐसी स्थिति में किसी हादसे के दौरान छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना संभव नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आवासीय भवनों में नियमों के विपरीत कोचिंग संचालन स्वीकार नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर संस्थानों को दूसरी जगह शिफ्ट होना होगा।
उपायुक्त भुवन गुप्ता ने कहा कि एमपी नगर भोपाल का सबसे बड़ा कोचिंग हब है, जहां अधिकांश कोचिंग पुराने भवनों में संचालित हो रही हैं। इन भवनों का निर्माण कोचिंग संचालन को ध्यान में रखकर नहीं किया गया था। इसलिए सभी संस्थानों को अपना फायर सेफ्टी प्लान तैयार कर जल्द निगम में जमा करना होगा, जिसके बाद इंजीनियरों की टीम मौके पर जाकर जांच करेगी।
प्रमुख निर्देश
* सभी भवनों में फिक्स फायर फाइटिंग सिस्टम अनिवार्य होगा।
* कम से कम 10 हजार लीटर पानी की क्षमता वाली व्यवस्था करनी होगी।
* दो सुरक्षित इमरजेंसी एग्जिट अनिवार्य होंगे।
* ऑटोमैटिक लॉक डोर नहीं लगाए जा सकेंगे।
* बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के लिए होगा।
* ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाना होगा।
* हर तीन महीने में मॉक ड्रिल कर छात्रों और स्टाफ को प्रशिक्षण देना होगा।
* सभी कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों को अग्निशमन उपकरण चलाने का प्रशिक्षण देना होगा।
* भवन में स्पष्ट एग्जिट साइन और प्राकृतिक धुआं निकासी की व्यवस्था जरूरी होगी।
* हर वर्ष फायर ऑडिट और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य रहेगा।
* 300 से अधिक क्षमता वाले संस्थानों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रबंध करने होंगे।
शपथ पत्र देकर बतानी होगी कमियां
नगर निगम ने सभी कोचिंग संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे 200 रुपए के न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र देकर यह बताएं कि उनके संस्थान में कौन-कौन सी कमियां हैं और उन्हें किस समय सीमा में दूर किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि निर्धारित अवधि में सुधार करने वाले संस्थानों को राहत दी जाएगी, लेकिन समय सीमा के बाद नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीधे कार्रवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे