भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का विरोध तेज, विधायक आरिफ मसूद ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
भोपाल, 13 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) का नाम बदलकर वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय किए जाने के प्रस्ताव का विरोध अब राजनीतिक स्तर पर भी तेज हो गया है। भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सोमवार को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय का नाम यथावत रखने की मांग की।
उन्होंने कहा कि 38 वर्ष पुरानी शैक्षणिक संस्था की पहचान और विरासत को समाप्त करना उचित नहीं है। यदि सरकार वाग्देवी भोजपाल के नाम से विश्वविद्यालय स्थापित करना चाहती है तो उसके लिए नई संस्था बनाई जाए।
आरिफ मसूद ने अपने ज्ञापन में कहा कि 3 जून 2026 को विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्ताव में महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के योगदान को कमतर बताते हुए यह उल्लेख किया गया कि उनका जीवन विदेश में बीता और भोपाल का निवासी होने के अलावा उनका कोई विशेष योगदान दिखाई नहीं देता। मसूद ने इसे स्वतंत्रता संग्राम के एक महान सेनानी का अपमान बताते हुए कहा कि इस प्रकार की टिप्पणी न केवल इतिहास के साथ अन्याय है, बल्कि देशभक्ति की भावना को भी ठेस पहुंचाने वाली है।
स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का किया उल्लेख
राज्यपाल को दिए ज्ञापन में आरिफ मसूद ने मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जापान में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार की नींव रखने का श्रेय मौलाना बरकतउल्ला को दिया जाता है। वर्ष 1913 में उन्होंने लाला हरदयाल के साथ मिलकर गदर पार्टी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उसके समाचार पत्र में राष्ट्रवादी विचारों से जुड़े लेख लिखे। उन्होंने यह भी बताया कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1 दिसंबर 1915 को अफगानिस्तान के काबुल में गठित स्वतंत्र भारत की पहली निर्वासित अंतरिम सरकार में राजा महेंद्र प्रताप सिंह को राष्ट्रपति और मौलाना बरकतउल्ला भोपाली को प्रधानमंत्री बनाया गया था। इसके अलावा उन्होंने रूस जाकर व्लादिमीर लेनिन से भारत की आजादी के आंदोलन के समर्थन की अपील भी की थी।
अंतरराष्ट्रीय सम्मान का भी किया जिक्र
ज्ञापन में दावा किया गया कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली की कब्र अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थित है, जहां उन्हें महान भारतीय राष्ट्रवादी नेता के रूप में सम्मानित किया गया है। मसूद ने कहा कि उनकी मृत्यु के बाद जर्मनी, रूस, जापान, तुर्की, ईरान और अफगानिस्तान सहित कई देशों में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई, जो उनके अंतरराष्ट्रीय सम्मान और योगदान का प्रमाण है।
'नई यूनिवर्सिटी बनाएं, लेकिन पुराना नाम न बदलें'
आरिफ मसूद ने स्पष्ट किया कि उन्हें वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय नाम से कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि यदि सरकार इस नाम से विश्वविद्यालय स्थापित करना चाहती है तो नई यूनिवर्सिटी खोले, लेकिन 38 वर्षों से स्थापित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलना उसकी ऐतिहासिक पहचान और विरासत को समाप्त करने जैसा होगा। उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया कि नाम परिवर्तन संबंधी प्रस्ताव पर हस्तक्षेप करते हुए उसे निरस्त किया जाए और स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के सम्मान एवं इतिहास की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे