भस्म आरती में त्रिशूल-त्रिपुंड और डमरू के साथ सजे बाबा महाकाल, भांग, चंदन और रजत आभूषणों से हुआ विशेष श्रृंगार

 




उज्जैन, 20 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक-पूजन किया गया।

भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का भांग, चंदन और आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा को त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू से अलंकृत किया गया। प्रथम घंटाल के बाद हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। इसके बाद बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं धारण कराई गईं। मोगरे और गुलाब के फूलों से भी भगवान का श्रृंगार किया गया। पूजन के बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर

भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामना कही। इस दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते भस्म आरती को महाकाल मंदिर की प्रमुख दैनिक आरतियों में विशेष महत्व प्राप्त है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे