भस्म आरती में दिव्य रूप में सजे महाकाल, रजत मुकुट-मुण्डमाल से हुआ श्रृंगार

 


- पट खुलते ही महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत से पूजन, भस्म आरती में गूंजे बाबा के जयकारे

उज्जैन, 12 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के चार बजे पट खुलते ही भस्म आरती की शुरुआत हुई। पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक-पूजन किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के साथ बाबा का ध्यान किया गया।

इसके बाद भगवान महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। बाबा को रजत ॐ, बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। मस्तक पर त्रिपुंड, त्रिशूल और डमरू का श्रृंगार किया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाओं से भगवान का अलंकरण किया गया। भांग, चंदन और आभूषण भी अर्पित किए गए।

भस्म आरती से पहले भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल-मिष्ठान का भोग लगाया गया। कपूर आरती और नैवेद्य के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी बाबा को भस्म अर्पित की गई।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने बाबा महाकाल और नंदी महाराज के दर्शन कर मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे