सागर में जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा का अनावरण: सादगी और शुचिता के प्रतीक को दी गई श्रद्धांजलि
सागर, 11 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर स्थित अटल पार्क में शनिवार को 'जननायक' भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ क्षेत्र में उनकी स्थापित होने वाली पहली प्रतिमा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश के दिग्गज राजनेताओं और विचारकों ने कर्पूरी ठाकुर के जीवन मूल्यों को याद किया।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने संघर्ष, परिश्रम और दूरदृष्टि को जीवन में अंगीकार कर देश को नई दिशा दी। भौतिक प्रतिस्पर्धा पर कटाक्ष करते हुए कहा हमारी संस्कृति ने कभी हाड़-मांस के ढांचे या पैसे की पूजा नहीं की, बल्कि हमेशा गुणों और नैतिकता की पूजा की है। कर्पूरी ठाकुर के पास बैंक बैलेंस या बड़ी संपत्ति नहीं थी, लेकिन उनके पास 'फकीरी' और दूसरों के लिए जीने का जज्बा था।
उन्होंने वरिष्ठ समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके जैसे मूल्यों के प्रति समर्पित व्यक्ति के कारण ही आज हम इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बन पा रहे हैं।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने कर्पूरी ठाकुर को सादगी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ने वाले कर्पूरी जी ने हमेशा गरीबों और पिछड़ों के हक की लड़ाई लड़ी। दो बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनके पास अपना निजी बंगला तक नहीं था, जो उनकी ईमानदारी का सबसे बड़ा प्रमाण है।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने सत्ता को सुख भोगने का साधन नहीं, बल्कि सेवा का केंद्र बनाया। उन्होंने पिछड़ों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जो तपस्या की, वह आज के राजनेताओं के लिए एक मार्गदर्शिका है।
वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने कर्पूरी ठाकुर को शांति और क्रांति का अद्भुत समन्वयक बताया। पूर्व गृहमंत्री और विधायक भूपेंद्र सिंह के विशेष प्रयासों से नगर निगम द्वारा प्रतिमा के लिए भूमि उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम में महापौर संगीता तिवारी, विधायक शैलेंद्र जैन, प्रदीप लारिया और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें 'भारत रत्न' दिए जाने के निर्णय को सभी वक्ताओं ने ऐतिहासिक बताया।
सागर में स्थापित यह प्रतिमा न केवल एक स्मारक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए शुचिता, ईमानदारी और लोक-कल्याण की राजनीति का एक जीवंत संदेश है। कर्पूरी ठाकुर का जीवन सिखाता है कि बिना पद और धन के भी समाज के हृदय में कैसे अमर हुआ जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे