बालाघाट: सोसायटी प्रबंधक के ठिकाने पर ईओडब्ल्यू का छापा, आय से अधिक संपत्ति की जांच

 


पांच बस, दो ट्रैक्टर समेत करोड़ों के वाहन मिले, बैंक खाते सीज, दस्तावेजों की पड़ताल जारी

बालाघाट, 17 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के लांजी क्षेत्र के नीमटोला निवासी और मनेरी सेवा सहकारी समिति के प्रभारी प्रबंधक विलास चौरे के आवास पर गुरुवार सुबह आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) जबलपुर की टीम ने दबिश दी। करीब डेढ़ दर्जन अधिकारियों की टीम ने सुबह लगभग 6 बजे कार्रवाई शुरू की।

ईओडब्ल्यू के अनुसार प्रारंभिक जांच में चौरे की ज्ञात आय की तुलना में बड़ी मात्रा में संपत्ति और निवेश से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। एजेंसी ने इसे आय से अधिक संपत्ति का मामला मानते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है।

ईओडब्ल्यू के मुताबिक कार्रवाई के दौरान पांच बस, दो ट्रैक्टर, चार चारपहिया और तीन दोपहिया वाहनों से संबंधित जानकारी मिली है। इनमें चार 50 सीटर बस, एक ट्रैवलर, दो बोलेरो, एक ग्रैंड विटारा और एक स्कॉर्पियो शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार इन वाहनों की अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपए है। दोनों ट्रैक्टर खेती के काम के लिए किराए पर चलाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। जांच में परिवार के नाम कृषि यंत्रों के कारोबार और पत्नी के नाम टूर एंड ट्रैवल्स व्यवसाय से जुड़े रिकॉर्ड भी मिले हैं। ‘मातोश्री’ नाम से बालाघाट से हैदराबाद मार्ग पर बसों के संचालन से संबंधित जानकारी भी ईओडब्ल्यू की जांच में शामिल है।

मकान, कृषि भूमि और जिम के उपकरण भी मिले

ईओडब्ल्यू के अनुसार चौरे ने वर्ष 2016 में लांजी में मकान बनवाया था, जिसके निर्माण पर करीब 50 लाख रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई है। करीब छह महीने पहले पास के गांव बिसोनी में लगभग 10 लाख रुपए की कृषि भूमि खरीदे जाने का रिकॉर्ड भी जांच में मिला है। घर में जिम शुरू करने की तैयारी से जुड़े करीब 10 लाख रुपए के उपकरण रखे होने की जानकारी भी अधिकारियों ने दी है। इसके अलावा एलआईसी की चार पॉलिसी और करीब पांच लाख रुपए के सोने से संबंधित जानकारी मिली है।

12 साल की नौकरी में करीब 25 लाख आय

ईओडब्ल्यू के डीएसपी मंजीत सिंह के अनुसार विलास चौरे वर्ष 2014 में सेवा सहकारी समिति में दैनिक वेतन भोगी के रूप में पदस्थ हुए थे। वर्तमान में वे मनेरी सेवा सहकारी समिति में प्रभारी प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। जांच एजेंसी के अनुसार करीब 12 वर्ष की सेवा अवधि में उनकी ज्ञात आय लगभग 25 लाख रुपए है। प्रारंभिक जांच में सामने आई संपत्तियां ज्ञात आय की तुलना में करीब 500 गुना अधिक होने का दावा किया गया है।हालांकि, संपत्तियों के वास्तविक मूल्यांकन और आय के ज्ञात स्रोतों से उनका अंतिम मिलान जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

बैंक खातों और निवेश की जानकारी जुटा रही ईओब्ल्यू

कार्रवाई के दौरान पत्नी, बेटे और ट्रैवल्स व्यवसाय से जुड़े बैंक खातों की जानकारी भी सामने आई है। ईओडब्ल्यू ने जिला सहकारी बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र से संबंधित खातों पर रोक लगाने की कार्रवाई की है। बैंक खातों में जमा राशि, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित बैंकों को पत्र भेजे गए हैं। अधिकारियों द्वारा घर से मिले दस्तावेजों, संपत्तियों के रिकॉर्ड, बीमा पॉलिसियों और वित्तीय लेनदेन का मिलान किया जा रहा है। समिति से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं।

प्रबंधक बोले- शिकायत जलन की भावना से की गई

विलास चौरे ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि ईओडब्ल्यू की टीम ने उनके निवास पर जांच की और उन्होंने टीम को पूरा सहयोग दिया। उनका कहना है कि शिकायत जलन की भावना से की गई है और उनकी छवि खराब करने की साजिश है। चौरे ने कहा कि जांच में यदि वे गलत पाए जाते हैं तो कार्रवाई के लिए तैयार हैं।

15 दिन में ईओडब्ल्यूकी दूसरी बड़ी कार्रवाई

बालाघाट जिले में करीब 15 दिन के भीतरईओडब्ल्यू की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है। इससे पहले 3 सितंबर को ईओडब्ल्यूने बालाघाट के पीआईयू-ई कमलकिशोर सिंगारे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की थी। ईओडब्ल्यू की ओर से उस कार्रवाई में करीब 11 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति और ज्ञात आय से 378 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिलने की जानकारी दी गई थी। वर्तमान मामले में ईओडब्ल्यूकी जांच जारी है। संपत्तियों का वास्तविक मूल्यांकन, आय के स्रोत और वित्तीय लेनदेन की जांच पूरी होने के बाद ही आय और संपत्ति के बीच वास्तविक अंतर की स्थिति स्पष्ट होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे