अनूपपुर: 10 दिन की गर्मी में सूख गया बकान डायसर्वन, जल संसाधन विभाग की लापरवाही से प्यासे खेत

 




अनूपपुर, 12 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में भीषण गर्मी के बीच क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों के लिए बकान डायवर्सन एक बार फिर निराशा का कारण बन गया है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित यह परियोजना किसानों को सिंचाई और ग्रामीणों को जल संकट से राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई थी, लेकिन विभागीय लापरवाही और रखरखाव के अभाव में यह योजना अब केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है।

हालत यह है कि डैम में भरा पानी मात्र 10 दिनों के भीतर ही सूख गया, जिससे आने वाले दिनों में पेयजल और सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हर साल गर्मी शुरू होते ही यही स्थिति निर्मित हो जाती है। डैम में चहुंओर गाद पूरी तरह और मिट्टी से पटा हुआ है। वर्षों से इसकी साफ-सफाई नहीं कराई गई, जिसके कारण जल संग्रहण क्षमता लगातार घटती जा रही है। दूसरी ओर डैम के गेट भी लंबे समय से खराब पड़े हुए हैं। समय पर मरम्मत नहीं होने से पानी का सही ढंग से संरक्षण नहीं हो पा रहा और थोड़े ही दिनों में पानी बहकर खत्म हो जाता है।

सैकड़ों किसानों होंगे प्रभावित

बकान डायवर्सन से सैकड़ों किसानों की खेती जुड़ी हुई है। इस पानी के भरोसे किसान धान, गेूंह, सब्जी और अन्य फसलों की तैयारी करते हैं, लेकिन जब समय पर पानी ही उपलब्ध नहीं होता तो किसानों की मेहनत और उम्मीद दोनों सूख जाती हैं। कई किसानों ने आरोप लगाया कि विभाग केवल कागजी निरीक्षण और योजनाओं तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्य नहीं किया जा रहा। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जब किसानों को पानी नहीं मिल रहा, तो योजना की उपयोगिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारी केवल गर्मी बीतने के बाद औपचारिक निरीक्षण करते हैं, लेकिन संकट के समय कोई राहत व्यवस्था नजर नहीं आती।

हैंडपंप और कुएं भी होंगे प्रभावित

बकान डायवर्सन के सूखने से अब गांवों में पेयजल संकट गहराने की आशंका भी बढ़ गई है। कई हैंडपंप और कुएं पहले ही जवाब देने लगे हैं। किसानों को डर है कि यदि जल्द ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो खरीफ सीजन की तैयारी भी प्रभावित होगी। इससे आर्थिक नुकसान के साथ ग्रामीणों की आजीविका पर भी सीधा असर पड़ेगा। डेम में पानी भराव रहने से क्षेत्र के कुओ में भी पानी की कमी नही होती है, वही जब डेम पूरी तरह सूख चुका है तो इसका असर क्षेत्र के जल स्त्रोतो पर भी पडऩे लगा है।

किसान रामप्रसाद बैगा ने बताया कि हम लोग पूरी खेती बकान डायवर्सन के पानी पर निर्भर होकर करते हैं, लेकिन इस बार तो गर्मी शुरू होते ही पानी खत्म हो गया। डैम में पानी टिक ही नहीं पाया। गेट खराब पड़े हैं और सफाई भी नहीं हुई, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

किसान संदीप बैगा ने बताया कि करोड़ों रुपये खर्च करके डैम बनाया गया, लेकिन फायदा किसानों तक नहीं पहुंच रहा। 10 दिन में पानी सूख जाना विभाग की बड़ी लापरवाही है। अगर समय रहते मरम्मत और साफ-सफाई हो जाती तो आज खेत सूखे नहीं रहते।

किसान भारत बैगा ने बताया कि हम लोगों ने सब्जी की तैयारी पानी की उम्मीद में की थी, लेकिन अब सिंचाई की चिंता सताने लगी है। विभाग के अधिकारी सिर्फ देखने आते हैं, लेकिन समाधान कोई नहीं करता। किसान हर साल इसी परेशानी से जूझ रहे हैं।

ग्रामीण किशन बैगा का कहना हैं कि डैम गाद, झाडिय़ों और मिट्टी से भरा पड़ा है। वही गेट खराब होने से पानी रुक ही नहीं रहा और गांव के कुंए-हैंडपंप भी सूखने लगे हैं। आने वाले दिनों में पीने के पानी का संकट भी बढ़ेगा।

छात्र लोकेश बैगा ने बताया कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, लेकिन जमीन पर हालत अलग हैं। सिंचाई का पानी नहीं मिलेगा तो खेती कैसे होगी? विभाग की उदासीनता के कारण सैकड़ों किसान परेशान हैं। अब प्रशासन को तुरंत स्थायी समाधान करना चाहिए।

कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन विभाग अनूपपुर के.पी. कडिय़ाम का कहा कि मैं जल्द निरीक्षण के लिए जाऊंगा, बकान डायसर्वन को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए योजना बनाकर कार्य किये जायेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला